- राज्य आयुष समिति, बिहार द्वारा महान चिकित्सक हकीम अजमल खान की जयंती पर किया गया भव्य आयोजन
- स्वास्थ्य मंत्री ने वीडियो संदेश में कहा- यूनानी पद्धति शरीर की प्रकृति (मिज़ाज) के अनुसार करती है समग्र उपचार
- अपर सचिव वैभव चौधरी रहे मुख्य अतिथि; विशेषज्ञों ने जनस्वास्थ्य में यूनानी चिकित्सा के महत्व पर की विस्तृत चर्चा
पटना
राजधानी पटना के ज्ञान भवन में बुधवार (11 फरवरी) को ‘यूनानी दिवस-2026’ के अवसर पर एक भव्य वैज्ञानिक संगोष्ठी और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। राज्य आयुष समिति, बिहार द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस दौरान यूनानी चिकित्सा के सिद्धांतों, आधुनिक समय में इसकी प्रासंगिकता और जनस्वास्थ्य में इसकी अहम भूमिका पर विशेषज्ञों ने विस्तार से मंथन किया।
रोग के मूल कारण को समझकर होता है उपचार
इस खास मौके पर राज्य के माननीय स्वास्थ्य मंत्री ने अपना एक वीडियो संदेश जारी किया।
- उन्होंने यूनानी चिकित्सा पद्धति की ऐतिहासिक विरासत और इसके वैज्ञानिक आधार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह शरीर की प्रकृति (मिज़ाज) के अनुसार उपचार पर आधारित एक समग्र प्रणाली है।
- यह पद्धति सिर्फ बीमारी के लक्षणों को नहीं, बल्कि रोग के मूल कारण को समझकर उसका जड़ से इलाज करती है।
- इसमें जीवनशैली सुधार, प्राकृतिक औषधियों और संतुलित आहार-विहार पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाता है, जिससे मरीजों को दीर्घकालिक (लंबे समय तक) स्वास्थ्य लाभ मिलता है। सरकार आयुष पद्धतियों के विस्तार के लिए लगातार काम कर रही है ताकि लोगों को सुरक्षित वैकल्पिक उपचार मिल सके।
हकीम अजमल खान का रहा है ऐतिहासिक योगदान
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव-सह-कार्यपालक निदेशक (राज्य आयुष समिति) श्री वैभव चौधरी ने महान चिकित्सक हकीम अजमल खान को याद किया।
- उन्होंने बताया कि ‘यूनानी दिवस’ हकीम अजमल खान की जयंती के उपलक्ष्य में ही मनाया जाता है।
- अजमल खान ने यूनानी चिकित्सा पद्धति के संरक्षण, संवर्धन और इसे जन-जन तक व्यवस्थित रूप से पहुंचाने में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी, जिससे इस पद्धति को एक संस्थागत और विश्वसनीय आधार मिला।
जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में है बेहद कारगर
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राज्य आयुष समिति के प्रशासी पदाधिकारी मो. शफीक ने बताया कि यह प्राचीन पद्धति जड़ी-बूटियों, प्राकृतिक संतुलन और दिनचर्या सुधार के जरिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाने पर जोर देती है।
वहीं, स्वागत संबोधन करते हुए राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. धनंजय शर्मा ने कहा कि आज के दौर में भी यूनानी चिकित्सा कई क्रॉनिक (दीर्घकालिक) और लाइफस्टाइल (जीवनशैली) से जुड़ी बीमारियों के प्रबंधन में बेहद प्रभावी, सुरक्षित और किफायती विकल्प है।
उत्कृष्ट चिकित्सकों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम के दौरान आयुष क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले यूनानी चिकित्सा पदाधिकारियों और चिकित्सकों को सम्मानित भी किया गया। वर्तमान में बिहार राज्य में यूनानी चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के लिए विभिन्न जिलों में संचालित यूनानी औषधालयों और संयुक्त आयुष इकाइयों के जरिए आम लोगों को मुफ्त परामर्श, उपचार और औषधियां उपलब्ध कराई जा रही हैं।
कार्यक्रम में ये गणमान्य रहे मौजूद:
संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के तौर पर स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव श्री शैलेश कुमार, संयुक्त सचिव श्रीमती अनुपमा सिंह, बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति के CEO श्री शशांक शेखर सिन्हा और राज्य औषधीय पादप बोर्ड के CEO श्री आलोक कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं विषय विशेषज्ञ मौजूद रहे।


