भागलपुर, 16 जुलाई 2025 | भागलपुर जिले के नारायणपुर प्रखंड अंतर्गत मधुरापुर गांव में मंगलवार को एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जब दो मासूम बच्चे गंगा नदी में डूबकर असमय काल के गाल में समा गए। इस हादसे के बाद इलाके में गहरा शोक और प्रशासन के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश देखा गया।
डूबने से हुई मौत, इलाज में देरी बनी जानलेवा
मृतकों की पहचान निसार अली के 9 वर्षीय पुत्र दिलशाद और खुर्शीद आलम के 10 वर्षीय पुत्र के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों बच्चे नारायणपुर गंगा घाट पर नहाने गए थे, जहां अवैध मिट्टी कटाई से बने गहरे गड्ढों में डूब गए। स्थानीय लोगों ने तत्काल बच्चों को पानी से जीवित अवस्था में बाहर निकाला, लेकिन अस्पताल में डॉक्टर की अनुपस्थिति और इलाज में देरी के कारण दोनों की मृत्यु हो गई।
प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गंगा घाट पर अवैध रूप से मिट्टी कटाई जारी है, जिससे खतरनाक गड्ढे बन गए हैं, और प्रशासन ने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया। हादसे के समय कोई सुरक्षा प्रबंध, चेतावनी संकेत या स्थानीय निगरानी टीम नहीं थी।
ज्ञापन सौंपकर जताया विरोध
घटना से आहत होकर समाजसेवी अजय रविदास के नेतृत्व में दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रशासनिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की बर्खास्तगी, प्रत्येक मृतक के परिवार को 10-10 लाख रुपये मुआवजा, अवैध मिट्टी व्यापारियों पर कठोर कार्रवाई और गंगा घाट पर स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग की गई है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
अजय रविदास ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने मांगें शीघ्र पूरी नहीं कीं, तो ग्रामीणों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “हर साल इस तरह की घटनाएं होती हैं, लेकिन प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहता है। बच्चों की मौत की जिम्मेदारी प्रशासन को लेनी चाहिए।”
यह हादसा एक बार फिर यह साबित करता है कि अवैध खनन, प्रशासनिक उदासीनता और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की कमी किस प्रकार निर्दोष जिंदगियों की बलि ले रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मांग पर क्या कदम उठाता है।


