गया। पितृपक्ष मेले में श्रद्धालुओं की सेवा करने वाली रीता रानी की कहानी हर किसी के लिए प्रेरणा बन गई है। ढाई फीट की इस महिला ने संवाद सदन में बनाए गए व्हीलचेयर सेंटर पर दिव्यांग और वृद्ध श्रद्धालुओं को मंदिर और पिंड वेदियों तक पहुँचाने का कार्य बखूबी निभाया।
श्रद्धालुओं की मदद में अविश्वसनीय योगदान
- रीता रानी, जो धनवा गांव, बोधगया के मध्य विद्यालय में शिक्षिका हैं, 7 सितंबर से लगातार श्रद्धालुओं की सेवा कर रही हैं।
- प्रतिदिन 200–250 लोगों को व्हीलचेयर पर मंदिर या घाट तक पहुँचाया जा रहा है। अब तक उन्होंने 1000 से अधिक लोगों की मदद की।
- उन्हें जिला प्रशासन ने व्हीलचेयर सेंटर का इंचार्ज बनाया है, लेकिन वह खुद सक्रिय होकर श्रद्धालुओं को व्हीलचेयर पर बैठाकर ले जाती हैं।
कठिनाइयों के बावजूद अडिग जज्बा
रीता रानी कहती हैं—
“मैं छोटे कद की हूं, भीड़ में काम करना आसान नहीं, लेकिन मुश्किल सफर भी नामुमकिन नहीं। बचपन से ही दिव्यांग और वृद्ध लोगों की सेवा करने का जज्बा रहा है।”
श्रद्धालुओं और अधिकारियों की तारीफ
- राजस्थान से आई सीडीपीओ अधिकारी ने रीता रानी के कार्यों को देखकर उनका हौसला बढ़ाया और फोटो खिंचवाया।
- एनसीसी छात्र शुभम ने कहा कि रीता रानी का जज्बा उन्हें भी प्रेरित करता है।
- संवाद सदन की इंचार्ज मोना ने बताया—
“रीता रानी मैडम के जज्बे के आगे कद कोई मायने नहीं रखता। उनकी सेवा सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है।”
नॉनस्टॉप सेवा
- रीता रानी सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक श्रद्धालुओं की सेवा में जुटी रहती हैं।
- उनका उद्देश्य है कि मेला क्षेत्र में आए सभी श्रद्धालु सुरक्षित और सुविधाजनक ढंग से अपने कार्य पूरे कर सकें।
श्रद्धालु बोले—आश्चर्यजनक सेवा
- बनारस से आए श्रद्धालु काशी नाथ:
“रीता रानी का कार्य समाज के उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो महिलाओं को कमजोर समझते हैं।”
- मध्यप्रदेश से आए लल्ला सिंह राजपूत और उनकी पत्नी लाड कुमार बाई ने कहा कि रीता रानी की मदद से पिंडदान करना बहुत आसान हो गया।
कुल मिलाकर, ढाई फीट कद की रीता रानी ने अपनी सेवा भावना और हौसले से यह साबित कर दिया कि कठिनाइयाँ चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, इंसान का जज्बा और निस्वार्थ सेवा उसे नामुमकिन को भी संभव बना देती है।


