ट्विशा शर्मा केस में नया खुलासा, मौत के अगले दिन 46 कॉल्स पर उठे सवाल; परिवार ने मांगी CBI जांच

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में अब एक नया और बेहद सनसनीखेज मोड़ सामने आया है। इस बार मामला मौत के बाद किए गए फोन कॉल्स को लेकर चर्चा में है। ट्विशा के पिता ने 46 मोबाइल नंबरों की एक सूची सार्वजनिक करते हुए दावा किया है कि उनकी बेटी की मौत के अगले ही दिन उसकी सास ने कई प्रभावशाली लोगों, जजों और सीसीटीवी से जुड़े लोगों को लगातार फोन किए थे।

इन दावों के सामने आने के बाद पूरे मामले ने नई दिशा पकड़ ली है। परिवार अब खुलकर कह रहा है कि यह केवल आत्महत्या का मामला नहीं बल्कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ और प्रभाव का इस्तेमाल करने की कोशिश भी हो सकती है। इसी वजह से पीड़ित परिवार ने अब मामले की CBI जांच की मांग तेज कर दी है।

मौत के अगले दिन किए गए कॉल्स पर उठे सवाल

ट्विशा शर्मा के पिता ने जो कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR सूची जारी की है, उसमें 46 मोबाइल नंबर शामिल बताए जा रहे हैं। दावा किया गया है कि 13 मई, यानी ट्विशा की मौत के अगले दिन, कई महत्वपूर्ण नंबरों पर लगातार कॉल किए गए।

परिवार का आरोप है कि इन नंबरों में कुछ न्यायिक अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों के संपर्क भी शामिल हैं। सूची में एक नंबर एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज का बताया गया है, जिस पर कई बार कॉल किए जाने का दावा किया गया है। इसके अलावा एक नंबर मध्य प्रदेश की एक प्रमुख जांच एजेंसी से जुड़े अधिकारी का बताया जा रहा है।

इन दावों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर मौत के तुरंत बाद इतने प्रभावशाली लोगों से लगातार संपर्क करने की जरूरत क्यों पड़ी।

CCTV मैकेनिकों को भी किए गए कॉल?

मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि जारी सूची में दो ऐसे नंबर भी बताए जा रहे हैं जो कथित तौर पर CCTV सिस्टम लगाने वाले युवकों के हैं। परिवार का दावा है कि विनोद वाणी और रोहित विश्वकर्मा नाम के युवकों को भी ट्विशा की मौत के अगले दिन फोन किए गए।

चूंकि इस पूरे मामले में CCTV फुटेज बेहद अहम माने जा रहे हैं, इसलिए इन कॉल्स को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। ट्विशा के परिजनों का आरोप है कि कहीं न कहीं फुटेज के साथ छेड़छाड़ या सबूतों को प्रभावित करने की कोशिश की गई हो सकती है।

हालांकि पुलिस ने अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन जांच एजेंसियां अब इन कॉल रिकॉर्ड्स की भी जांच कर सकती हैं।

परिवार ने उठाई CBI जांच की मांग

इन नए आरोपों के बाद ट्विशा के परिवार ने मामले की CBI जांच की मांग और तेज कर दी है। बुधवार को परिवार ने मंत्रालय पहुंचकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग रखी।

परिवार का कहना है कि मामले में प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, इसलिए स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच संभव नहीं दिख रही। उनका आरोप है कि यदि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को नहीं सौंपी गई तो सच सामने आने में मुश्किल हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने परिवार को भरोसा दिलाया कि सरकार इस संवेदनशील मामले में हर संभव सहयोग करेगी और जांच में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

राज्यपाल को भी लिखा गया पत्र

ट्विशा शर्मा के पिता ने राज्यपाल को भी पत्र लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।

पत्र में उन्होंने गिरिबाला सिंह को वर्तमान पद से हटाने की मांग भी उठाई है। परिवार का कहना है कि जब किसी अधिकारी पर इतने गंभीर आरोप लगे हों, तब उनका किसी न्यायिक या अर्ध-न्यायिक पद पर बने रहना उचित नहीं माना जा सकता।

गौरतलब है कि गिरिबाला सिंह इस समय भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग की बेंच-2 की अध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वे जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर भी रह चुकी हैं।

फरार पति समर्थ सिंह पर इनाम बढ़ा

इस मामले में ट्विशा के पति अब भी फरार बताए जा रहे हैं। 15 मई को एफआईआर दर्ज होने के बाद से पुलिस लगातार उनकी तलाश कर रही है।

पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर समर्थ सिंह पर घोषित इनाम की राशि 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दी गई है। पुलिस कई संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है, लेकिन अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

स्थानीय अदालत ने भी समर्थ सिंह को 23 मई तक कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। यदि वह निर्धारित समय तक पेश नहीं होता है तो कानूनी कार्रवाई और तेज हो सकती है।

दोबारा पोस्टमार्टम की मांग कोर्ट ने ठुकराई

इस बीच परिवार की ओर से ट्विशा का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग भी अदालत में रखी गई थी, लेकिन भोपाल कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया।

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने कहा कि AIIMS भोपाल में किया गया पहला पोस्टमार्टम पूरी तरह नियमों के अनुसार हुआ था और रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे मेडिकल टीम और आरोपियों के बीच मिलीभगत साबित हो सके।

अदालत ने कहा कि केवल आशंकाओं के आधार पर दोबारा पोस्टमार्टम की अनुमति नहीं दी जा सकती। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली AIIMS में पोस्टमार्टम कराने का आदेश देना उसके क्षेत्राधिकार में नहीं आता।

शव संरक्षण को लेकर भी चिंता

सुनवाई के दौरान अदालत ने शव के संरक्षण को लेकर भी चिंता जताई। कोर्ट ने कटारा हिल्स थाना प्रभारी को निर्देश दिया कि बेहतर फ्रीजिंग सुविधा वाले मेडिकल संस्थानों की तलाश की जाए ताकि शव सुरक्षित रखा जा सके।

यह मामला अब केवल एक संदिग्ध मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें प्रशासनिक प्रभाव, न्यायिक निष्पक्षता और सबूतों की सुरक्षा जैसे कई गंभीर सवाल जुड़ चुके हैं।

पूरे देश की नजर इस केस पर

ट्विशा शर्मा मामला अब मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है। सोशल मीडिया पर लोग लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं। कई महिला संगठनों और सामाजिक समूहों ने भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कॉल रिकॉर्ड्स और CCTV से जुड़े आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला और ज्यादा गंभीर हो सकता है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई नए खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

परिवार अब भी यही उम्मीद लगाए बैठा है कि निष्पक्ष जांच होगी और ट्विशा शर्मा को न्याय मिलेगा।

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