वॉशिंगटन/पटना | 21 फरवरी, 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापारिक नीतियों को वहां की न्यायपालिका ने एक बड़ा झटका दिया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा दुनिया भर के देशों पर लगाए गए टैरिफ (आयात शुल्क) को रद्द कर दिया है। 9 जजों की पीठ में से 6 जजों ने राष्ट्रपति के इस कदम को ‘असंवैधानिक और गैरकानूनी’ करार दिया।
इस फैसले के बाद अब ट्रंप प्रशासन के लिए अन्य देशों के खिलाफ ‘ट्रेड वॉर’ छेड़ना कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण हो गया है।
संविधान का हवाला: कांग्रेस के पास है शक्ति
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स की अध्यक्षता वाली पीठ ने निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा। अदालत ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान के तहत टैक्स या टैरिफ लगाने की शक्ति विशेष रूप से ‘कांग्रेस’ (संसद) के पास है, न कि कार्यपालिका (राष्ट्रपति) के पास।
अदालत की मुख्य टिप्पणियां:
- आपातकालीन शक्तियों का दुरुपयोग: कोर्ट ने कहा कि ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट’ (IEEPA) राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता।
- युद्ध जैसी स्थिति नहीं: मुख्य न्यायाधीश रॉबर्ट्स ने ट्रंप की दलील को खारिज करते हुए तीखी टिप्पणी की— “अमेरिका हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापार घाटे को ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ बताकर टैरिफ थोपना कानून के दायरे से बाहर है।
पीठ में मतभेद: 6 बनाम 3 का फैसला
जहाँ 6 जजों ने टैरिफ को रद्द करने के पक्ष में वोट दिया, वहीं तीन जजों ने इससे असहमति जताई।
- बहुमत (पक्ष में): मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स के साथ पांच अन्य जजों ने माना कि कराधान (Taxation) की शक्ति कार्यपालिका को नहीं सौंपी जा सकती।
- अल्पमत (विरोध में): न्यायमूर्ति सैमुअल अलिटो, क्लैरेंस थॉमस और ब्रेट कावनों ने दलील दी कि टैरिफ लगाना एक ‘वैध नीति’ हो सकती है और ऐतिहासिक आधार पर राष्ट्रपति के पास इसके अधिकार रहे हैं। हालांकि, उनका यह तर्क बहुमत के सामने टिक नहीं सका।
क्या होगा वैश्विक असर?
राष्ट्रपति ट्रंप ने पद संभालते ही कई देशों (चीन, यूरोप और अन्य व्यापारिक साझेदारों) पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता का माहौल था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद:
- राहत: भारत सहित उन सभी देशों को बड़ी राहत मिल सकती है जो अमेरिकी टैरिफ के निशाने पर थे।
- विकल्प: हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि यह फैसला ट्रंप को अन्य विशिष्ट कानूनों के तहत शुल्क लगाने से पूरी तरह नहीं रोकता, लेकिन ‘आपातकालीन शक्तियों’ का उपयोग अब संभव नहीं होगा।
द वॉयस ऑफ बिहार का विश्लेषण
डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत टैरिफ सबसे बड़ा हथियार था। सुप्रीम कोर्ट के इस ‘हंटर’ ने राष्ट्रपति की शक्तियों को सीमित कर दिया है। अब देखना होगा कि ट्रंप प्रशासन इस कानूनी अड़चन से निकलने के लिए कांग्रेस (संसद) का रुख करता है या कोई नया विधायी रास्ता अपनाता है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


