शेखपुरा (बिहार): जिले के अरियरी प्रखंड के देवपुरी गांव से एक ऐसी प्रेरणादायक घटना सामने आई है, जिसने समाज में फैली दहेज प्रथा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह कहानी सिर्फ एक शादी की नहीं, बल्कि इंसानियत, समझदारी और सच्चे प्रेम की मिसाल बन गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक गरीब परिवार की लड़की, जिसके माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका था, अपने बड़े भाई के सहारे जीवन बिता रही थी। भाई मजदूरी कर किसी तरह घर चलाता था और बहन की शादी के लिए पैसे जुटाने में लगा हुआ था।
लड़की की शादी तय हुई थी, लेकिन दहेज में 70,000 रुपये की मांग की गई थी। काफी मेहनत के बाद भी भाई केवल 40,000 रुपये ही जुटा सका। शेष राशि पूरी न होने के कारण शादी की तारीख कई बार टाल दी गई, जिससे परिवार पर मानसिक दबाव बढ़ता गया।
बताया जाता है कि निराशा के बीच लड़की ने अपने होने वाले दूल्हे से फोन पर बात की और अपनी स्थिति बताते हुए भावुक हो गई। उसकी बात सुनकर युवक ने एक बड़ा फैसला लिया।
वह बिना किसी तामझाम और बारात के सीधे लड़की के घर पहुंच गया और साफ शब्दों में कहा कि उसे किसी तरह का दहेज नहीं चाहिए। इसके बाद गांव के भगवती स्थान मंदिर में दोनों की सादगीपूर्ण शादी कराई गई।
इस शादी में न बैंड-बाजा था और न ही किसी तरह का दिखावा, लेकिन सच्चे भावनात्मक जुड़ाव और आपसी सहमति ने इसे खास बना दिया। गांव के लोगों ने इस कदम की सराहना की और इसे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश बताया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे उदाहरण बढ़ें, तो दहेज जैसी कुप्रथा को समाप्त किया जा सकता है और गरीब परिवारों की बेटियों के लिए शादी आसान हो सकती है।
यह घटना न केवल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि समाज को यह सोचने पर भी मजबूर कर रही है कि शादी जैसे पवित्र संबंध में लेन-देन की बजाय आपसी सम्मान और समझ को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।


