सीबीआई की विशेष अदालत में 36.99 करोड़ के मामले की सुनवाई, अगली तारीख 26 अगस्त 2025 तय
भागलपुर | बहुचर्चित सृजन घोटाले के एक अहम मामले में मंगलवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने ट्रायल की औपचारिक शुरुआत कर दी। यह मामला मुख्यमंत्री विकास योजना की 36 करोड़ 99 लाख 33 हजार 548 रुपये की बंदरबांट से जुड़ा है, जो 2014 से 2017 के बीच भागलपुर में हुई थी।
पूर्व डीएम पर गंभीर आरोप
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश सुनील कुमार-2 ने भागलपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी बीरेंद्र प्रसाद यादव के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय किए।
फिलहाल बीरेन्द्र यादव कृषि विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत हैं। आरोप सुनाए जाने के दौरान वे कोर्ट में मौजूद रहे और अपने ऊपर लगे आरोपों से इंकार किया।
घोटाले की पृष्ठभूमि
- 2014–2017 के बीच भागलपुर में मुख्यमंत्री विकास योजना के तहत जारी राशि में गड़बड़ी हुई।
- 36.99 करोड़ रुपये अवैध रूप से सृजन महिला विकास समिति के खाते में स्थानांतरित किए गए।
- यह रकम दो सरकारी बैंक खातों से चेक और ड्राफ्ट के माध्यम से ट्रांसफर हुई:
- ₹12.20 करोड़ (चेक)
- ₹9.75 करोड़ (चेक)
- ₹5.50 करोड़ (ड्राफ्ट)
- सीबीआई ने 2017 में एफआईआर दर्ज कर अब तक तीन चार्जशीट दाख़िल की। तीसरी चार्जशीट में पूर्व डीएम को आरोपी बनाया गया।
इनके खिलाफ पहले ही आरोप तय
इस केस में पूर्व डीएम के अलावा अन्य आरोपी हैं—
- विश्वनाथ दत्ता
- नवीन कुमार राय
- एनवी राजू
- ज्ञानेन्द्र कुमार
- बंशीधर झा
- रजनी प्रिया (सृजन समिति की अध्यक्ष मनोरमा देवी की बहू)
- सरिता झा
- सुबा लक्ष्मी प्रसाद
कोर्ट की अगली कार्यवाही
विशेष अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 26 अगस्त 2025 तय की है। साथ ही सीबीआई को अभियोजन गवाह पेश करने का निर्देश दिया है।
क्या है सृजन घोटाला?
सृजन घोटाला बिहार के भागलपुर जिले में हुआ एक बड़ा वित्तीय घोटाला है, जिसमें सरकारी योजनाओं के करोड़ों रुपये गैरकानूनी तरीके से सृजन महिला विकास समिति के खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। इस पैसे का दुरुपयोग विभिन्न निजी कामों और निवेश में किया गया। इस घोटाले में कई राजनेता, अफसर और बैंक अधिकारी आरोपी हैं।


