पटना, 15 जुलाई 2025:बिहार में शिक्षा व्यवस्था की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए 2005 से पहले के हालात पर एक नजर डालना ज़रूरी है। कभी जहाँ स्कूलों में ब्लैकबोर्ड और जर्जर इमारतें सामान्य दृश्य थीं, वहीं आज बिहार के विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, साफ-सुथरे भवन, और तकनीकी शिक्षा के उन्नत साधन उपलब्ध हैं।
बेटियों की शिक्षा बनी प्राथमिकता
2005 में जब नीतीश कुमार ने राज्य की बागडोर संभाली, तब राज्य में महिला साक्षरता दर मात्र 33.57% थी। बेटियों की शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का आधार मानते हुए सरकार ने मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना, पोशाक योजना, छात्रवृत्ति, और मिड-डे मील जैसी योजनाओं की शुरुआत की। इसका सीधा असर यह हुआ कि आज महिला साक्षरता दर बढ़कर 73.91% तक पहुंच चुकी है।
शिक्षा के बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव
| वर्ष | 2005 से पहले | 2025 तक |
|---|---|---|
| विद्यालयों की संख्या | 53,993 | 75,812 |
| शिक्षक | 2.25 लाख | 5.97 लाख |
| राज्य विश्वविद्यालय | 10 | 21 |
- आज 75% से अधिक स्कूलों में बेहतर भवन, स्वच्छ शौचालय, स्वच्छ जल, और अच्छी बैठने की व्यवस्था मौजूद है।
तकनीकी शिक्षा को मिला नया आयाम
2005 तक जहाँ राज्य में केवल दो इंजीनियरिंग कॉलेज थे, वहीं अब उनकी संख्या 38 तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा:
- पॉलिटेक्निक संस्थान: 13 से बढ़कर 46
- आईटीआई संस्थान: 23 से बढ़कर 152
- डिजिटल शिक्षा: स्मार्ट क्लास, ई-लर्निंग और वीडियो लेक्चर की सुविधा अब सामान्य हो चुकी है
उच्च शिक्षा में आई नई ऊर्जा
बिहार अब IIT पटना, IIM बोधगया, IIIT भागलपुर और निफ्ट मुजफ्फरपुर जैसे संस्थानों का घर बन चुका है। इससे राज्य के छात्रों को राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान और रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
वित्तीय प्रतिबद्धता: बदलाव की रीढ़
- 2005 से पहले शिक्षा बजट: ₹4,366 करोड़
- 2025 में शिक्षा बजट: ₹77,690 करोड़
यह आश्चर्यजनक वृद्धि इस बात की गवाही देती है कि शिक्षा को लेकर सरकार की प्राथमिकता कितनी स्पष्ट और ठोस रही है।
शिक्षा के जरिये समाजिक सशक्तिकरण
नीतीश सरकार की योजनाओं ने उन तबकों को भी शिक्षा से जोड़ा जो दशकों तक इससे दूर थे। छात्रवृत्तियाँ, दोपहर भोजन योजना, और बालिकाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन कार्यक्रमों ने न केवल स्कूलों की उपस्थिति बढ़ाई, बल्कि सशक्त, शिक्षित और जागरूक समाज के निर्माण की नींव भी रखी।


