
भागलपुर/मालदा | पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने ट्रेन परिचालन को सुचारू बनाने की दिशा में शुक्रवार (6 फरवरी 2026) को एक और बड़ा कदम उठाया है। मंडल ने पुनसिया हॉल्ट (बाराहाट-टिकानी सेक्शन) पर ‘सिंगल लाइन इंटरमीडिएट ब्लॉक सिग्नलिंग (IBS)’ प्रणाली को सफलतापूर्वक चालू कर दिया है।
क्या होगा फायदा? (कम समय, ज्यादा ट्रेनें)
डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता और सीनियर डीएसटीई राजेंद्र कुमार की देखरेख में शुरू हुई इस नई प्रणाली से यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा:
- ब्लॉक सेक्शन छोटा हुआ: पहले दो स्टेशनों के बीच की दूरी ज्यादा होने से जब तक एक ट्रेन अगले स्टेशन नहीं पहुंचती थी, पीछे वाली ट्रेन रुकी रहती थी।
- अब क्या होगा: नई IBS प्रणाली ने इस लंबी दूरी को छोटे हिस्सों में बांट दिया है। अब एक ही ट्रैक पर कम दूरी के अंतराल पर एक के पीछे एक ट्रेनें चल सकेंगी।
- परिणाम: इससे ट्रेनों की लेट-लतीफी कम होगी और लाइन की क्षमता (Capacity) बढ़ेगी।
मालदा मंडल का यह दूसरा IBS है
रेलवे तेजी से अपनी तकनीक को अपग्रेड कर रहा है।
- इससे पहले मालदा मंडल ने सांझा में पहला IBS सिस्टम लगाया था।
- पुनसिया हॉल्ट पर यह दूसरा सफल प्रयोग है, जो बताता है कि रेलवे चरणबद्ध तरीके से पुराने सिस्टम को बदल रहा है।
सुरक्षा के लिए लगी खास मशीनें
सिर्फ रफ्तार ही नहीं, सुरक्षा का भी पूरा ख्याल रखा गया है। इस नए सिस्टम में दो हाईटेक डिवाइस लगाए गए हैं:
- SSBPAC (सॉलिड स्टेट ब्लॉक प्रोविंग एक्सल काउंटर)
- MSDAC (मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर)
आसान भाषा में समझें तो ये मशीनें ट्रेन के पहियों को सटीक तरीके से गिनकर यह सुनिश्चित करती हैं कि ट्रैक खाली है या नहीं, जिससे दुर्घटना की संभावना खत्म हो जाती है।


