मोतिहारी में ट्रेड यूनियनों का हल्ला बोल: केंद्र सरकार के नए ‘लेबर कोड’ के खिलाफ सड़क पर उतरे लोग; ई-रिक्शा बंद होने से यात्री हुए बेहाल

  • विभिन्न ट्रेड यूनियनों ने किया मोतिहारी बंद का आह्वान, हाथों में झंडा और तख्तियां लेकर निकाली गई आक्रोश रैली
  • केंद्र सरकार की नीतियों और नए श्रम कानूनों (Labor Codes) को वापस लेने की उठाई गई पुरजोर मांग
  • ई-रिक्शा चालकों ने भी दिया हड़ताल को समर्थन; शहर की रफ्तार थमी, आम यात्रियों को करना पड़ा भारी परेशानी का सामना

द वॉयस ऑफ बिहार (मोतिहारी)

​केंद्र सरकार की नीतियों और नए श्रम कानूनों के खिलाफ गुरुवार को पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में भी भारी आक्रोश देखने को मिला। विभिन्न ट्रेड यूनियनों (Trade Unions) के आह्वान पर शहर में बंदी कराई गई और सरकार के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस बंदी का असर शहर की यातायात व्यवस्था पर भी सीधा पड़ा, जिससे आम लोगों को काफी फजीहत झेलनी पड़ी।

झंडे और तख्तियां लेकर सड़क पर उतरे संगठन

​बंद को सफल बनाने के लिए सुबह से ही विभिन्न संगठनों और ट्रेड यूनियनों से जुड़े लोग सड़क पर उतर आए।

  • ​प्रदर्शनकारियों ने हाथों में अपनी मांगों की तख्तियां और झंडे लेकर पूरे शहर में एक विशाल आक्रोश रैली निकाली।
  • ​इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
  • क्या हैं मांगें: विरोध कर रहे लोगों का मुख्य निशाना सरकार द्वारा लाए गए नए ‘लेबर कोड’ (श्रम कानून) थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ये नए नियम मजदूर और कर्मचारी विरोधी हैं। इसके अलावा भी उन्होंने अपनी कई अन्य स्थानीय और राष्ट्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।

ई-रिक्शा चालकों का समर्थन, थमी शहर की रफ्तार

​इस विरोध प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि मोतिहारी के ई-रिक्शा चालकों ने भी इस बंदी का पूर्ण समर्थन किया।

  • ​ई-रिक्शा चालकों के हड़ताल में शामिल होने के कारण शहर की लाइफलाइन माने जाने वाले ई-रिक्शा सड़कों से पूरी तरह नदारद रहे।
  • यात्री हुए परेशान: इसके परिणामस्वरूप, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और शहर के विभिन्न हिस्सों में जाने वाले आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा या पैदल ही सफर तय करना पड़ा।

​फिलहाल, ट्रेड यूनियनों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं और लेबर कोड में बदलाव नहीं किया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है।

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