पटना
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में अब बस कुछ ही घंटे बचे हैं। कल यानी 14 नवंबर को तय हो जाएगा कि बिहार की सत्ता की चाबी किसके हाथ जाएगी।
लेकिन उससे पहले नेताओं की बेचैनी चरम पर है।
एक तरफ एग्ज़िट पोल में दिखती बढ़त ने कई नेताओं के चेहरे खिला दिए हैं, तो दूसरी तरफ साइलेंट वोटर्स ने नींद उड़ा दी है—क्योंकि उनके फैसले का संकेत किसी को नहीं मिला।
साइलेंट वोटर्स करेंगे कमाल?—किसी ने पत्ता नहीं खोला
चुनावी मैदान में इस बार जनता बिल्कुल चुप है।
गांवों–कस्बों से लेकर शहरों तक दो नारे खूब सुने गए—
➡ “खाएंगे सोच के, वोट देंगे सोच के”
➡ “कहीं चुपचाप… वही करेंगे काम”
मतलब साफ है—जनता क्या सोच रही है, किसी को नहीं पता।
यह साइलेंट वोटर्स ही इस चुनाव का किंगमेकर बन सकते हैं।
नेताओं की परेशानी इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि जातिगत समीकरण, भीतरघात और स्थानीय फैक्टर के अलावा जनता का मूड पूरी तरह बिखरा हुआ दिखाई दे रहा है।
दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर – कई मंत्रियों की किस्मत फंसी
BJP के कई बड़े नाम मुश्किल में?
इस चुनाव में नीतीश सरकार के 36 में से 29 मंत्री मैदान में हैं—
- BJP के 16 मंत्री
- JDU के 13 मंत्री
भाजपा के कई दिग्गज नेताओं की राह आसान नहीं दिख रही, जिनमें ये शामिल हैं—
- सम्राट चौधरी
- विजय कुमार सिन्हा
- डॉ. प्रेम कुमार
- रेणु देवी
- मंगल पांडेय
- नीरज कुमार सिंह
- नीतिन नवीन
- जीवेश कुमार
- संजय सरावगी
- कृष्णनंदन पासवान
- केदार प्रसाद गुप्ता
- सुरेंद्र मेहता
- डॉ. सुनील कुमार
- राजू सिंह
- कृष्ण कुमार मंटू
कई सीटों पर तीसरा प्रत्याशी मुकाबला बिगाड़ रहा है, जिससे स्थिति और पेचीदा हो गई है।
➡ कई सीटों पर हार की आशंका जताई जा रही है।
HAM के संतोष सुमन और BJP के जनक राम भी टेंशन में
कई सीटों पर मुकाबला इतना करीबी है कि हार–जीत में 500–1000 वोट का अंतर हो सकता है।
नीतीश कैबिनेट के पूर्व मंत्री भी जोखिम क्षेत्र में बताए जा रहे हैं।
JDU की भी मुश्किल बढ़ी—कई मंत्री फंसे
जदयू के इन बड़े नामों की राह मुश्किल मानी जा रही है—
- विजय कुमार चौधरी
- बिजेंद्र प्रसाद यादव
- श्रवण कुमार
- लेसी सिंह
- मदन सहनी
- महेश्वर हजारी
- शीला कुमारी
- सुनील कुमार
- जयंत राज
- मो. जमा खान
- रत्नेश सदा
- विजय मंडल
- सुमित कुमार
➡ कई सीटों पर महागठबंधन ने जोरदार चुनौती दी है।
➡ कई सीटों पर तिकोना मुकाबला बना है।
CM नीतीश और अशोक चौधरी मैदान में नहीं—फिर भी दांव बड़ा
इस बार नीतीश कुमार और अशोक चौधरी चुनाव मैदान में नहीं हैं,
लेकिन जदयू के अस्तित्व,
NDA की सरकार,
और नीतीश की नेतृत्व क्षमता सब कुछ इस नतीजे पर टिका है।
कौन भारी पड़ेगा?—साइलेंट वोटर्स या एग्ज़िट पोल?
- एग्ज़िट पोल NDA की बढ़त बताते हैं
- कुछ सर्वे RJD को सबसे बड़ा दल दिखा रहे हैं
- साइलेंट वोटर्स ने सभी समीकरण बदल दिए हैं
➡ यही वजह है कि नेताओं के लिए आज की रात नींद वाली नहीं, बल्कि इंतज़ार वाली बन गई है।
कल सुबह 9 बजे से शुरू होगा रोमांच
- 8 बजे पोस्टल बैलेट
- 8:30 बजे EVM गिनती
- 9 बजे रुझान
- दोपहर तक तस्वीर साफ
तब तय होगा—
➡ NDA की सत्ता वापसी होगी?
➡ या महागठबंधन बाजी पलट देगा?


