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सदन की कार्यवाही के दौरान टीएमसी सांसदों ने लांघी सीमा, जानें पूरा मामला

ByShailesh Kumar

Jul 23, 2021

सदन की कार्यवाही के दौरान केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के खिलाफ गलत आचरण करने वाले तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के खिलाफ केंद्र सरकार कड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्र सरकार इन सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएगी। समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि गुरुवार को आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव उच्च सदन में पेगासस रिपोर्ट पर अपना वक्तव्य जारी कर रहे थे। इसी दौरान तृणमूल कांग्रेस सांसद शांतनु सेन ने उनके हाथ से पेपर छीन लिया। गौरतलब है संसद में मॉनसून सत्र चल रहा है। गुरुवार को पेगासस जासूसी मामले को लेकर कई बार राज्यसभा की कार्यवाही बाधित हुई। वहीं विपक्षी दलों ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान हुई मौतों और कृषि कानूनों को लेकर भी कई बार सरकार को घेरा।

बहस बढ़ी तो मार्शलों को देना पड़ा दखल
सूत्रों के हवाले से जारी रिपोर्ट में समाचार एजेंसी बताया गया है कि केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव गुरुवार को राज्यसभा की कार्रवाई के दौरान पेगासस जासूसी मामले पर अपना वक्तव्य जारी कर रहे थे। इसी दौरान टीएमसी के सांसद शांतनु सेन गुप्ता ने उनके हाथ से कागज छीन लिया। बताया जाता है कि इस घटना के बाद शांतनु सेन की एक अन्य केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ तीखी बहस भी हुई। भाजपा और टीएमसी सांसदों के बीच बहस का सिलसिला थमा नहीं और आखिरकार राज्यसभा की कार्यवाही रोकनी पड़ी। समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि दोनों दलों के सांसदों के बीच बहस रोकने के लिए सदन में तैनात मार्शलों को भी दखल देना पड़ा।

मीनाक्षी लेखी ने भी की आलोचना
वहीं टीएमसी सांसद सेन के साथ इस घटना के बाद आईटी मंत्री वैष्णव ने संसदीय मामलों के मंत्री प्रहलाद जोशी, राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल, मंत्रियों धर्मेंद्र प्रसाद और वी मुरलीधरन के साथ मीटिंग की। इस दौरान सदन में जो कुछ हुआ उस पर विचार-विमर्श किया गया। केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने शांतनु सेन की आलोचना करते हुए टीएमसी पर मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहाकि विपक्ष, खासतौर पर टीएमसी और कांग्रेस के सांसद जो कर रहे हैं, उससे देश की प्रतिष्ठा को धक्का लगा है। एक केंद्रीय मंत्री द्वारा वक्तव्य जारी करते हुए एक सांसद पत्र छीन लेता है। इससे पहले यह लोकतंत्र में ऐसा कभी देखने को नहीं मिला। उन्होंने आगे कहाकि इससे पहले हम देख ही चुके हैं कि जब प्रधानमंत्री नए केंद्रीय मंत्रियों का सदन से परिचय करा रहे थे तो उन्होंने कैसा आचरण किया था।