भागलपुर — तिलकामांझी विश्वविद्यालय इन दिनों किसी जल-नगर से कम नहीं दिख रहा। गंगा के उफान ने ऐसा कहर बरपाया कि पूरा कैंपस बाढ़ के पानी से घिर गया है। अब हालात यह हैं कि विभागाध्यक्ष से लेकर चपरासी तक, और कागज़ जमा करने आए छात्र से लेकर दफ्तर के बाबू तक—सबकी ज़िंदगी नाव पर सवार है।
नाव ही ‘ऑफिस बस’ बन गई
विश्वविद्यालय परिसर के भीतर आने-जाने का एकमात्र साधन नाव है। रोज़ सुबह कर्मचारी और छात्र जैसे लोग बस या बाइक पकड़ते हैं, वैसे ही यहां अब नाव पर चढ़ते हैं।
खतरनाक सफर, मजबूरी का नाम नाव
तेज़ बहाव और गहराई के बीच लोग दस्तावेज़ लेने, प्रशासनिक काम करने और पढ़ाई से जुड़े कामों के लिए रोज़ाना जोखिम उठा रहे हैं। कई बार लहरें नाव को हिला देती हैं, जिससे सफर और भी खतरनाक हो जाता है।
‘टापू’ में बदला कैंपस
चारों तरफ पानी और बीच में विश्वविद्यालय—नज़ारा ऐसा है मानो तिलकामांझी यूनिवर्सिटी बाढ़ के समंदर में एक टापू हो। आसपास के इलाकों में भी यही हाल है, जिससे न सिर्फ़ आवाजाही ठप है बल्कि विश्वविद्यालय की कई गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं।
स्थानीय लोग चिंतित
कई लोगों का कहना है कि अगर पानी और बढ़ा, तो विश्वविद्यालय के अंदर पढ़ाई और प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप हो जाएगा।


