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गया: बिहार विधानसभा चुनाव-2025 में गया जिले की बेलागंज विधानसभा सीट इस बार सबसे दिलचस्प मुकाबलों में से एक बन गई है। यहां महागठबंधन की ओर से राजद ने डॉ. विश्वनाथ सिंह को मैदान में उतारा है, जबकि एनडीए की ओर से जदयू ने पूर्व विधायक मनोरमा देवी पर दांव लगाया है।

वहीं, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने मुस्लिम उम्मीदवार मोहम्मद अमजद को टिकट देकर एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण को चुनौती दी है।


विचारधारा बनाम सत्ता की जंग

यह मुकाबला सिर्फ दो दलों के बीच नहीं, बल्कि दो राजनीतिक विचारधाराओं — अनुभवी नेतृत्व बनाम स्थापित सत्ता की परीक्षा बन गया है। जातीय समीकरण, प्रचार और वोट ट्रांसफर इस सीट का नतीजा तय करेंगे।


भोजपुरी कलाकारों से सजी राजद की सभा

राजद प्रत्याशी डॉ. विश्वनाथ सिंह ने नामांकन के बाद बेलागंज पड़ाव मैदान में भोजपुरी कलाकारों की मौजूदगी वाली बड़ी सभा की। इसमें छोटू छलिया, टुनटुन यादव और मुस्कान तिवारी जैसे कलाकारों ने मंच संभाला।
सभा में युवाओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे राजद के युवा जनाधार को लेकर उत्साह देखने को मिला। हालांकि भीड़ के कारण अव्यवस्था फैल गई और कई युवक मंच पर चढ़ गए, जिससे कुछ कलाकार असहज नजर आए।


सुरेंद्र यादव का एकल प्रचार अभियान

सभा में महागठबंधन के बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी ने कार्यकर्ताओं को निराश किया। मंच पर केवल पूर्व मंत्री और जहानाबाद सांसद डॉ. सुरेंद्र प्रसाद यादव मौजूद रहे, जिन्होंने अपने पुत्र विश्वनाथ सिंह के लिए वोट मांगे।
उन्होंने एनडीए पर तीखा प्रहार करते हुए कहा —

“2020 में जदयू तीन सीटों पर लड़ी थी, अब केवल एक पर क्यों? गया जिले से जदयू का सफाया हो चुका है।”


जातीय समीकरण बना मुख्य फैक्टर

बेलागंज की राजनीति हमेशा जातीय समीकरण पर टिकी रही है। मनोरमा देवी और विश्वनाथ सिंह दोनों यादव समुदाय से हैं, लेकिन इस बार मुकाबला सिर्फ जाति नहीं, बल्कि संगठन और रणनीति का है।
डॉ. विश्वनाथ सिंह के पिता सुरेंद्र यादव मगध क्षेत्र में यादव समुदाय के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। पिता-पुत्र की यह जोड़ी इस बार यादव वोटों को एकजुट करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।


बेलागंज में एमवाई समीकरण की परीक्षा

2024 के उपचुनाव में एमवाई समीकरण टूट गया था — यादव वोट दो हिस्सों में बंट गए थे और मुस्लिम वोट तीन भागों में। इस बार जन सुराज के मोहम्मद अमजद फिर मैदान में हैं, जिससे वोट विभाजन की आशंका है।
राजद अपने पारंपरिक वोटबैंक को वापस जोड़ने की कोशिश में है, जबकि जदयू के लिए यह सीट प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुकी है।


2020 में तीन सीटों पर हार, अब एक पर उम्मीद

2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने गया जिले की तीन सीटों — बेलागंज, अतरी और शेरघाटी पर चुनाव लड़ा था, लेकिन तीनों पर हार का सामना करना पड़ा।
इस बार एनडीए ने जदयू को केवल बेलागंज सीट दी है। लोजपा (रा) बोधगया और शेरघाटी में लड़ रही है। इसलिए पूरा संगठन बेलागंज पर केंद्रित है।


राजद का पुराना किला, जदयू की नई चुनौती

राजद का बेलागंज पर वर्षों से मजबूत प्रभाव रहा है — सुरेंद्र यादव सात बार विधायक चुने गए। हालांकि 2024 के उपचुनाव में मनोरमा देवी की जीत ने समीकरण बदला।
2025 का चुनाव फिर पुरानी जंग को ताजा कर रहा है, जहां जन सुराज की मौजूदगी से यह मुकाबला त्रिकोणीय बन गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वोट ट्रांसफर, जातीय रणनीति और प्रचार की तीव्रता तय करेगी कि बेलागंज की गद्दी किसके हाथ जाएगी।


रिपोर्टर: सुमित कुमार
स्थान: गया
अपडेट: 10 अक्टूबर 2025


 

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