“सत्य के मार्ग पर चलने वाले की हमेशा होती है जीत” – तेज प्रताप यादव का ट्वीट बना चर्चा का विषय

पटना | 7 जून 2025

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से निष्कासित होने के बाद भी पूर्व मंत्री और लालू प्रसाद यादव के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय हैं। शनिवार को तेज प्रताप ने एक भावनात्मक ट्वीट कर न केवल अपनी स्थिति स्पष्ट की बल्कि सत्य और संघर्ष की मिसालें देते हुए सीधा संदेश भी दिया।

📢 तेज प्रताप का ट्वीट: “सत्य का मार्ग कठिन अवश्य है, पर विजय उसी की होती है”

तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:

“सत्य का रास्ता चुनने वालों की हमेशा जीत होती है। हमेशा सच की रास्ता पर चलना चाहिए। सत्य का मार्ग कठिन अवश्य है पर विजय सदा सत्य के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति की होती है।”

उन्होंने अपने पोस्ट में राजा हरिश्चंद्र और पांडवों का उदाहरण देते हुए समझाया कि किस तरह सत्य पर अडिग रहने वालों ने अंततः जीत हासिल की।

📸 शेयर कीं दो तस्वीरें, जनता दरबार जैसा दृश्य

इस ट्वीट के साथ तेज प्रताप यादव ने दो तस्वीरें भी साझा की हैं, जिसमें वह आम जनता की समस्याएं सुनते हुए दिखाई दे रहे हैं। तस्वीरों में जनता दरबार जैसा माहौल झलकता है, जैसा उनके पिता लालू यादव के कार्यकाल में हुआ करता था।

🔥 पार्टी से निष्कासन के बाद भी दिखा रहे राजनीतिक सक्रियता

गौरतलब है कि तेज प्रताप यादव को हाल ही में RJD से पहले छह साल के लिए निष्कासित, और फिर हमेशा के लिए पार्टी से बाहर कर दिया गया। यह कार्रवाई अनुष्का यादव प्रकरण को लेकर हुई, जिसने पार्टी के भीतर ही हलचल मचा दी थी।

हालांकि निष्कासन के बाद भी तेज प्रताप यादव लगातार सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए सक्रिय बने हुए हैं और अपनी बातें जनता तक पहुँचा रहे हैं।

🗳️ आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर तेज प्रताप दिखा रहे सक्रियता

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेज प्रताप का यह पोस्ट सिर्फ दर्शन और प्रेरणा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकेत भी है कि वे आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सक्रिय रणनीति बना रहे हैं।

उनका जनता से संवाद और सोशल मीडिया पर सक्रियता दर्शाती है कि वे एक नई राजनीतिक पारी की तैयारी में हैं — चाहे RJD के बाहर ही क्यों न हो।

📌 निष्कासन के बाद पहला बड़ा संकेत

तेज प्रताप यादव के इस ट्वीट को कई लोग राजनीतिक कटाक्ष के रूप में भी देख रहे हैं — शायद उनके ही किसी करीबी या परिवार के सदस्य पर अप्रत्यक्ष हमला।

अब देखना यह होगा कि वे आगामी समय में नया राजनीतिक मंच बनाएंगे, किसी अन्य दल में शामिल होंगे, या स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरेंगे।

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