विधानसभा में डिप्टी सीएम विजय सिन्हा का बड़ा ऐलान
- जाली दस्तावेज पर नकेल: अब जमीन के फर्जी कागज देने पर अनिवार्य रूप से होगी एफआईआर; सरकार कर रही 7 साल की सजा का प्रावधान
- जनकल्याण संवाद: 12 दिसंबर से चल रहा ‘भूमि सुधार संवाद’ अब हर जिले में होगा; दाखिल-खारिज और मापी का मौके पर होगा निपटारा
- बजट पास, विपक्ष नाराज: राजस्व विभाग का 21.90 अरब का बजट मंजूर; जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने किया सदन से वाकआउट
द वॉयस ऑफ बिहार (पटना)
बिहार में जमीन विवादों की सबसे बड़ी जड़ ‘फर्जी दस्तावेजों’ पर लगाम लगाने के लिए नीतीश सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। शुक्रवार को बिहार विधानसभा में उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि राज्य में जमीन से संबंधित जाली दस्तावेज पेश करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामलों में न केवल अनिवार्य रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज होगी, बल्कि 7 साल की सजा का प्रावधान भी किया जा रहा है
जिलावार लगेंगे शिविर, मौके पर समाधान
डिप्टी सीएम ने बताया कि जमीन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार जनता के द्वार जा रही है।
- विस्तार: 12 दिसंबर से प्रमंडल स्तर पर शुरू हुआ ‘भूमि सुधार जनकल्याण संवाद’ अब जिलावार भी आयोजित किया जाएगा
- फोकस एरिया: इन शिविरों में मुख्य रूप से दाखिल-खारिज (Mutation), परिमार्जन (Correction) और जमीन मापी के मामलों को टारगेट करके मौके पर ही समाधान कराया जा रहा है
- गाइडलाइन: समान प्रकृति की समस्याओं के लिए एक स्टैंडर्ड गाइडलाइन भी तय की जा रही है ताकि अधिकारियों को निर्णय लेने में आसानी हो
बजट पास, विपक्ष का वाकआउट
विजय सिन्हा विभाग के बजट पर सरकार का पक्ष रख रहे थे। चर्चा के बाद सदन ने विभाग के 21 अरब 90 करोड़ 15 लाख एक हजार रुपए के बजट पर अपनी मुहर लगा दी। हालांकि, सरकार के जवाब से नाराज होकर विपक्षी सदस्यों ने सदन से वाकआउट कर दिया।
भूमि विवाद बिहार की एक बड़ी समस्या है और यह कानून गेम चेंजर साबित हो सकता है।


