पर्चा मिला, लेकिन घर नहीं: जगदीशपुर के भूमिहीनों पर बेदखली का संकट, प्रशासन की भूमिका पर सवाल

भागलपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड में भूमिहीन परिवारों की समस्या एक बार फिर गंभीर रूप लेती नजर आ रही है। वर्ष 2023 में जिला प्रशासन द्वारा जिन भूमिहीन परिवारों को बसने के लिए पर्चा (भूमि आवंटन) दिया गया था, वे आज भी पक्के मकान और स्थायी पुनर्वास से वंचित हैं। मजबूरी में ये परिवार झुग्गी-झोपड़ी बनाकर खुले आसमान के नीचे जीवन गुजारने को मजबूर हैं।

पीड़ित परिवारों का आरोप है कि पर्चा मिलने के बावजूद न तो उन्हें जमीन पर बसाया गया और न ही किसी प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था की गई। इसके उलट अब जगदीशपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और अंचलाधिकारी (CO) द्वारा झुग्गी-झोपड़ियों को खाली करने और क्षेत्र छोड़ने की चेतावनी दी जा रही है। इस कथित कार्रवाई से भूमिहीन परिवारों में भय, आक्रोश और असंतोष का माहौल व्याप्त है।

स्थानीय भूमिहीनों का साफ कहना है कि “पहले हमें पर्चा के अनुसार बसाया जाए, उसके बाद ही किसी तरह की कार्रवाई की जाए।” उनका यह भी कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण वे दोहरी मार झेल रहे हैं—न घर मिला और अब बेदखली का डर।

इस पूरे मामले को लेकर भाजपा झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष शंकर गुप्ता ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में ही प्रशासन ने इन भूमिहीन परिवारों को पर्चा प्रदान किया था, लेकिन आज तक उनका पुनर्वास नहीं किया गया, जो बेहद चिंताजनक है।

शंकर गुप्ता ने जानकारी दी कि इस गंभीर जनसमस्या को आगामी 5 जनवरी को भागलपुर में आयोजित उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के जन संवाद कार्यक्रम में प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए जल्द ठोस कदम उठाएगी।

अब बड़ा सवाल यह है कि सरकार और प्रशासन कब तक इन भूमिहीन परिवारों को उनका अधिकार, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध करा पाएंगे, या फिर ये परिवार केवल आश्वासनों के सहारे ही जीने को मजबूर रहेंगे।

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