पटना
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे आने वाले हैं और राज्य में राजनीतिक उत्सुकता चरम पर है। एक ओर समर्थकों के बीच जीत का इंतज़ार है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन द्वारा जश्न, रोड शो और विजय जुलूस पर प्रतिबंध लगाए जाने से कई कारोबारियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
चुनाव का असर अब सीधे पटना समेत कई शहरों के बाजारों में साफ दिखने लगा है।
फूल बाजार में जबरदस्त रौनक, बढ़ी डिमांड
चुनाव जीत का जश्न हो और फूलों की माला की मांग न बढ़े—ऐसा कभी नहीं होता।
इसी उम्मीद में पटना के फूल बाजार पूरी तरह सज चुके हैं।
- गुलाब
- गेंदे
- ऑर्किड
- रजनीगंधा
- विभिन्न प्रकार की माला
—की अच्छी-खासी मांग देखी जा रही है।
दुकानदारों ने बताया कि समर्थक पहले ही कई तरह की मालाओं और फूलों का ऑर्डर दे चुके हैं।
➡ “जीत किसकी होगी पता नहीं, लेकिन फूलों की मांग हर हाल में रहती है।” — फूल विक्रेता
मिठाई दुकानदार असमंजस में—ऑर्डर नहीं, बस पूछताछ
एग्जिट पोल में NDA को बढ़त दिख रही है, वहीं महागठबंधन इसे सिरे से खारिज कर रहा है।
राजनीतिक अनिश्चितता का सीधा असर मिठाई कारोबारियों पर पड़ा है।
दुकानदारों का कहना है—
- समर्थक दुकान पर आकर रेट पूछते हैं
- मिठाइयों की किस्में देखते हैं
- लेकिन ऑर्डर कन्फर्म नहीं कर रहे
- कुछ लोग अचानक बड़े ऑर्डर का आश्वासन देकर चले जा रहे हैं
➡ “हम स्टॉक रखें या नहीं—समझ में नहीं आ रहा।” — मिठाई व्यापारी
कई दुकानदारों ने लड्डू, पेड़ा और रसगुल्ला की आपूर्ति बढ़ाने का मन बनाया था, पर प्रतिबंध और असमंजस के कारण अभी ठहराव बना हुआ है।
बैंड-बाजा वालों की निराशा—“कमाई अटक गई”
मतगणना के दिन जश्न और विजय जुलूस पर प्रशासन ने साफ पाबंदी लगा दी है।
इसका सबसे ज़्यादा असर बैंड-बाजा और जगराता टीमों पर पड़ा है।
➡ “हमारी सबसे बड़ी कमाई चुनावी जीत के जश्न से होती थी, लेकिन इस बार कुछ नहीं मिलेगा।” — एक बैंड संचालक
हालांकि शादी-ब्याह का सीजन शुरू हो चुका है, पर चुनावी माहौल में होने वाला एक्स्ट्रा काम इस बार लगभग खत्म हो गया है।
बाजार में उत्सुकता, पर माहौल शांत—नतीजों का इंतज़ार
जबकि फूल बाजार में खरीदारों की भीड़ दिख रही है, मिठाई और बैंड कारोबारियों में अनिश्चितता है।
हर कोई परिणाम का इंतज़ार कर रहा है, लेकिन
➡ उत्साह है पर जश्न नहीं
➡ डिमांड है पर ऑर्डर नहीं
➡ उम्मीद है पर पक्का भरोसा नहीं
14 नवंबर को सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होगी और उसके बाद ही स्पष्ट होगा कि
किसके यहां मिठाई बंटेगी और किसके फूल बिकेंगे?


