ब्रेन मलेरिया से 6 बच्चों की मौत से हड़कंप, 7 दर्जन मरीजों के मिलने से सहमें लोग

साहिबगंज जिले में ब्रेन मलेरिया का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है, और अब तक कुल 84 मरीजों की पहचान हो चुकी है। यह सिलसिला मंडरो प्रखंड के नगरभीट्ठा गांव से शुरू हुआ था, जो अब जिले के अन्य हिस्सों में फैल चुका है। इस बीच, मंडरो में ब्रेन मलेरिया से हुई मौतों की जांच के लिए रांची से एक उच्चस्तरीय टीम साहिबगंज पहुंची।

मंडरो में छह बच्चों की मौत के बाद कार्रवाई

मंडरो प्रखंड में ब्रेन मलेरिया से छह बच्चों की मौत के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू की है। जांच में सामने आया कि नगरभीट्ठा गांव में जनवरी के बाद से स्वास्थ्य कर्मी नहीं पहुंचे थे। इसके बाद सीएचओ खुशबू रानी, एमपीडब्लू डोमन मंडल, एएनएम शांतिलता मुर्मू और एमटीएस प्रवीर कुमार सिन्हा का वेतन रोक दिया गया है और सभी से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। इसके अलावा, बुधवार को मलेरिया के छह नए मरीज मिले।

मंडरो, नगरभिट्ठा, उपर चतरो, बोरियो के धपानी पहाड़ और डोलेपहाड़ क्षेत्रों में मलेरिया के मरीज मिले। चांदी पहाड़िन नामक एक गर्भवती महिला को इलाज के लिए मंडरो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। इस तरह जिले में मलेरिया मरीजों की संख्या अब 84 हो गई है।

नगरभिट्ठा में स्वास्थ्य सहिया की कमी

रांची से आई उच्चस्तरीय टीम का नेतृत्व वेक्टर जनित रोग के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. वीरेंद्र कुमार सिंह कर रहे थे, जिनके साथ मलेरिया निरीक्षक अनिल कुमार और मच्छर पकड़ने वाली तीन सदस्यीय टीम भी थी। टीम ने सिविल सर्जन कार्यालय में सीएस और सभी एमपीडब्लू के साथ बैठक की और फिर मंडरो प्रखंड का दौरा किया।

वहां की जांच में यह बात सामने आई कि नगरभिट्ठा गांव में कोई स्वास्थ्य सहिया नहीं है, जिससे इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इसके बाद स्वास्थ्य सहिया की बहाली की प्रक्रिया शुरू की गई है। राज्य सरकार ने पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक नया नियम अपनाया है, जिसमें हर पहाड़ी गांव में एक स्वास्थ्य सहिया नियुक्त किया जाएगा। यदि कोई सहिया उपलब्ध नहीं होती है, तो वहां सूचना प्रदाता का चयन किया जाएगा।

मच्छरों की जांच और नियंत्रण

टीम ने मच्छरों के नियंत्रण के लिए विशेष प्रयास किए। कीट संग्रहकर्ताओं ने बरहेट के खिजुरखाल और चुटिया क्षेत्रों में जाकर एनोफिल, क्यूलेक्स और सनफ्लाई मच्छरों को पकड़ा। एंथोनी तिग्गा ने बताया कि एनोफिल मच्छर मलेरिया, क्यूलेक्स मच्छर फाइलेरिया और सनफ्लाई मच्छर कालाजार फैलाने का कारण बनते हैं।

वहीं , खिजुरखाल में जहां आइआरएस दवा का छिड़काव हुआ था, वहां कम मच्छर मिले, जबकि चुटिया में छिड़काव नहीं होने के कारण वहां अधिक मच्छर पाए गए। इन मच्छरों की जांच लैब में की जाएगी, ताकि यह पता चल सके कि ये मच्छर कितने खतरनाक हैं और आइआरएस दवा का कितना असर हुआ है। इसके बाद, मलेरिया नियंत्रण के लिए नई रणनीति तैयार की जाएगी।

लापरवाही पर सख्त कार्रवाई

ब्रेन मलेरिया से हुई मौतों और बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की है। स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ जांच में यह पाया गया कि नगरभीट्ठा में स्वास्थ्य कर्मी जनवरी के बाद से नहीं पहुंचे थे, जिसके चलते मलेरिया फैलने का खतरा बढ़ा। इस पर दोषी कर्मचारियों का वेतन रोकते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। जिले में मलेरिया के बढ़ते मामलों के बीच प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है और मच्छर जनित रोगों के नियंत्रण के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

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