नई दिल्ली: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने बुधवार को राज्यसभा में आयोजित विदाई समारोह के दौरान सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि राजनीति में कभी फुलस्टॉप नहीं होता। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में सक्रियता और सेवा का सिलसिला निरंतर चलता रहता है।
यह अवसर उन 37 सांसदों के सम्मान में आयोजित किया गया था, जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इनमें से कुछ सदस्य दोबारा सदन में लौटेंगे, जबकि कई नए चेहरे उच्च सदन का हिस्सा बनेंगे।
सदन को बताया “एक बड़ी यूनिवर्सिटी”
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में राज्यसभा को लोकतांत्रिक मूल्यों की पाठशाला बताया। उन्होंने कहा:
“सदन में हमारी शिक्षा भी होती है और दीक्षा भी।”
“यह अपने आप में एक बहुत बड़ी यूनिवर्सिटी है।”
“नए सांसदों को वरिष्ठ सदस्यों से सीखने का अवसर मिलता है।”
उन्होंने कहा कि हर सांसद का योगदान महत्वपूर्ण होता है और सदन की गरिमा सभी के सामूहिक प्रयासों से बनती है।
वरिष्ठ नेताओं की सराहना
अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं की खुलकर तारीफ की, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
Mallikarjun Kharge
Sharad Pawar
H. D. Deve Gowda
उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा संसदीय कार्यों में समर्पित किया है और उनका अनुभव देश के लिए अमूल्य है।
“इतना लंबा कार्यकाल कोई छोटी बात नहीं”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लंबे समय तक संसद में सक्रिय रहना और जनता की सेवा करना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा:
“इतना लंबा कार्यकाल कोई छोटी बात नहीं है। यह समर्पण, अनुशासन और जिम्मेदारी का प्रतीक है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो सांसद सदन से विदा ले रहे हैं, वे अपने अनुभव के आधार पर समाज और सार्वजनिक जीवन में आगे भी योगदान देते रहेंगे।
राजनीति में ‘रिटायरमेंट’ नहीं होता: खरगे
प्रधानमंत्री के बाद कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता Mallikarjun Kharge ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा:
“राजनीति में लोग न तो टायर्ड होते हैं और न ही रिटायर्ड।”
“मुझे राजनीति में 54 साल हो गए हैं, लेकिन आज भी सीखने की जरूरत महसूस होती है।”
उनका यह बयान सदन में मौजूद सदस्यों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
लोकतंत्र की भावना से ऊपर उठने का आह्वान
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि विदाई जैसे अवसरों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एक साझा भावना उभरती है। उन्होंने कहा कि यह समय सहयोग, सम्मान और अनुभवों को साझा करने का होता है।
निष्कर्ष
राज्यसभा में यह विदाई समारोह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं और अनुभवों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण अवसर रहा। प्रधानमंत्री मोदी का “राजनीति में कोई फुलस्टॉप नहीं होता” वाला संदेश सार्वजनिक जीवन में निरंतर सक्रियता और सेवा की भावना को दर्शाता है।


