झारखंड से बिहार तक फैला शराब का ‘सफेद सिंडिकेट’: नवगछिया मद्यनिषेध पुलिस ने जान्हवी चौक पर पिकअप के भीतर पकड़ा 5 लाख का माल

नवगछिया/भागलपुर। बिहार में पूर्ण शराबबंदी को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासनिक मशीनरी अब केवल छापेमारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वह उन अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय मार्गों की भी घेराबंदी कर रही है जिनका उपयोग तस्कर ‘सफेद जहर’ के परिवहन के लिए करते हैं। इसी कड़ी में भागलपुर जिले के नवगछिया मद्यनिषेध पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। गुप्त सूचना के आधार पर इस्माइलपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत जान्हवी चौक के पास की गई सघन घेराबंदी में पुलिस ने झारखंड से आ रही शराब की एक बड़ी खेप को बरामद किया है। 442 लीटर से अधिक विदेशी शराब के साथ दो तस्करों की गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार की सीमाओं पर चौकसी अब और अधिक तकनीकी और खुफिया आधारित हो गई है।

​जान्हवी चौक: तस्करों का सुरक्षित मार्ग और पुलिस का अभेद्य जाल

​नवगछिया का जान्हवी चौक भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। यह क्षेत्र झारखंड और बंगाल से आने वाले वाहनों के लिए एक प्रमुख प्रवेश द्वार की तरह काम करता है। तस्कर अक्सर इस मार्ग का उपयोग इसलिए करते हैं ताकि वे मुख्य राजमार्गों की तुलना में ग्रामीण और लिंक रोड के माध्यम से गंतव्य तक पहुँच सकें। लेकिन 8 अप्रैल 2026 की यह सुबह तस्करों के लिए भारी साबित हुई।

​मद्यनिषेध विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि झारखंड के रास्ते एक पिकअप वाहन में शराब की बड़ी खेप भागलपुर की ओर बढ़ रही है। इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए मद्यनिषेध थानाध्यक्ष के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने जान्हवी चौक के पास वाहनों की जांच शुरू की। जैसे ही संदिग्ध पिकअप (जिसका विवरण पहले से ही पुलिस के पास था) चौक के पास पहुँची, उसे रोककर जांच की गई। शुरुआत में चालक और उसके सहयोगी ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जब वाहन की सघन तलाशी ली गई, तो उसके भीतर बनाए गए गुप्त तहखानों और बोरियों के बीच छिपी विदेशी शराब की बोतलें बरामद हुईं।

​442.80 लीटर विदेशी शराब: तस्करी का अर्थशास्त्र

​बरामदगी का आंकड़ा तस्करी के इस काले कारोबार की भयावहता को दर्शाता है। पुलिस ने कुल 442.80 लीटर विदेशी शराब जब्त की है। यह खेप केवल मात्रा के हिसाब से ही बड़ी नहीं है, बल्कि इसकी बाजार कीमत भी प्रशासनिक सफलता की गवाही दे रही है। विभाग द्वारा इस जप्त माल की अनुमानित कीमत ₹5,31,360/- (पांच लाख इकतीस हजार तीन सौ साठ रुपये) आंकी गई है।

​तस्करी के इस अर्थशास्त्र को समझने की जरूरत है। झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों में शराब की कीमतें कम होने और बिहार में इसकी अत्यधिक मांग के कारण, तस्कर कम निवेश में मोटा मुनाफा कमाने के लिए इस तरह के जोखिम उठाते हैं। 5 लाख से अधिक की यह खेप संभवतः भागलपुर और आसपास के इलाकों में स्थानीय डीलरों को आपूर्ति की जानी थी। इस बरामदगी ने न केवल एक बड़े सिंडिकेट के वित्तीय ढांचे को चोट पहुँचाई है, बल्कि यह भी संदेश दिया है कि सरकारी तंत्र की पैनी नजर अब हर संदिग्ध वाहन पर है।

​झारखंड कनेक्शन: सरायकेला खरसावां के दो अभियुक्त गिरफ्तार

​इस कार्रवाई की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों का परिचय है। पुलिस ने मौके से दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जो मूल रूप से झारखंड के रहने वाले हैं:

  1. भगवान बारी (उम्र 25 वर्ष): पिता-जमींदार बारी, निवासी-आदित्यपुर, वार्ड नंबर-12, जिला-सरायकेला खरसावां।
  2. रोहन लाल (उम्र 19 वर्ष): पिता-संतोष लाल, निवासी-आदित्यपुर, वार्ड नंबर-02, जिला-सरायकेला खरसावां।

​इन दोनों की गिरफ्तारी यह साबित करती है कि झारखंड के सरायकेला खरसावां और आदित्यपुर जैसे क्षेत्र शराब तस्करी के नए ट्रांजिट हब के रूप में उभर रहे हैं। 19 साल के रोहन लाल जैसे युवाओं को इस धंधे में शामिल करना सिंडिकेट की उस रणनीति का हिस्सा है जहाँ वे कम उम्र के लड़कों को पैसों का लालच देकर ‘कैरियर’ (वाहक) के रूप में इस्तेमाल करते हैं। पुलिस अब इन दोनों से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि शराब कहाँ से लोड की गई थी और भागलपुर में इसका ‘रिसीवर’ कौन था। यह झारखंड और बिहार पुलिस के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

​टीम वर्क और रणनीतिक सफलता

​किसी भी सफल ऑपरेशन के पीछे एक समर्पित टीम और सटीक रणनीति होती है। इस सफल कार्रवाई का नेतृत्व मद्यनिषेध थानाध्यक्ष ने किया। टीम के मुख्य सदस्यों में शामिल थे:

  • ​अवर निरीक्षक राजू कुमार
  • ​सहायक अवर निरीक्षक (मद्यनिषेध) अर्जुन कुमार महतो
  • ​मद्यनिषेध सिपाही और गृहरक्षक बल के जवान।

​इन अधिकारियों की मुस्तैदी ने यह सुनिश्चित किया कि तस्करों को भागने का कोई मौका न मिले। अक्सर वाहन चेकिंग के दौरान तस्कर पुलिस को चकमा देने के लिए हिंसक तरीके भी अपनाते हैं, लेकिन यहाँ पुलिस की रणनीतिक स्थिति इतनी मजबूत थी कि दोनों अभियुक्तों को विधिवत और शांतिपूर्ण तरीके से गिरफ्तार कर लिया गया।

​बिहार में पूर्ण शराबबंदी: चुनौतियां और विभाग का संकल्प

​बिहार में शराबबंदी कानून लागू हुए वर्षों बीत चुके हैं, लेकिन पड़ोसी राज्यों की खुली सीमाओं के कारण तस्करी एक सतत चुनौती बनी हुई है। भागलपुर का मद्यनिषेध विभाग इस चुनौती से निपटने के लिए अब ‘रैंडम चेकिंग’ (आकस्मिक जांच) के बजाय ‘इंटेलिजेंस-बेस्ड’ (खुफिया आधारित) कार्रवाई पर अधिक जोर दे रहा है। जान्हवी चौक की यह बरामदगी इसी रणनीति का प्रतिफल है।

​मद्यनिषेध विभाग का स्पष्ट संदेश है कि अवैध शराब के विरुद्ध अभियान थमेगा नहीं। जिले के प्रवेश द्वारों पर निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी सूचना तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। विभाग का मुख्य उद्देश्य केवल शराब पकड़ना नहीं है, बल्कि उस पूरे आपूर्ति तंत्र (Supply Chain) को ध्वस्त करना है जो राज्य के बाहर से संचालित हो रहा है।

​निष्कर्ष और आगामी कार्रवाई

​जप्त की गई 442.80 लीटर शराब और पिकअप वाहन को वर्तमान में पुलिस अभिरक्षा में रखा गया है। गिरफ्तार अभियुक्तों भगवान बारी और रोहन लाल को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पुलिस अब इनके कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) खंगाल रही है ताकि तस्करी के इस जाल में शामिल अन्य स्थानीय ‘मास्टमाइंड’ तक पहुँचा जा सके।

​यह कार्रवाई भागलपुर पुलिस और मद्यनिषेध विभाग के लिए एक बड़ी जीत है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब पड़ोसी राज्यों से तस्करी के नए-नए तरीके इजाद किए जा रहे हैं। जान्हवी चौक पर मिली यह सफलता तस्करी के विरुद्ध जारी युद्ध में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

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