HIGHLIGHTS: रसोई गैस की किल्लत पर सरकार का ‘मास्टरस्ट्रोक’; पाइप से घर-घर पहुँचेगी राहत
- नया आदेश: गैस कंपनियों को पाइप बिछाने की अनुमति अब 24 घंटे में मिलेगी; देरी हुई तो ‘स्वतः मंजूर’ (Deemed Approved) माना जाएगा।
- किफायती और सुरक्षित: LPG के मुकाबले PNG ज्यादा सस्ती और प्रभावी; 18 जिलों में बुनियादी ढांचा तैयार, 1 लाख घरों में सप्लाई शुरू।
- सुपरफास्ट सेवा: कंपनियां 24 घंटे में 75 हजार और एक हफ्ते में 70 हजार नए घरेलू कनेक्शन देने के लिए तैयार।
- 24/7 काम: गैस कंपनियों को दिन-रात काम करने की छूट; सरकारी जमीन के उपयोग के लिए मिलेंगी सांकेतिक दरें।
- अगला मिशन: भागलपुर, दरभंगा, बांका समेत 20 नए जिलों में जल्द बिछेगा पीएनजी का जाल।
पटना | 20 मार्च, 2026
बिहार में रसोई गैस के लिए सिलेंडरों की कतार और ‘ब्लैक’ के खेल पर राज्य सरकार ने आखिरी प्रहार कर दिया है। उपमुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य में PNG (Piped Natural Gas) विस्तार को लेकर ऐतिहासिक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह फैसला न केवल आम आदमी की जेब बचाएगा, बल्कि “सबका सम्मान-जीवन आसान” (Ease of Living) के मिशन को भी रफ्तार देगा।
‘अधिकारी नहीं रोक पाएंगे फाइल’: 24 घंटे का ‘अल्टीमेटम’
डिप्टी सीएम ने नगर निकायों की सुस्ती को दूर करने के लिए ‘स्वतः अनुमति’ का फॉर्मूला लागू किया है:
- ऑटो-अप्रूवल: यदि नगर निकाय 24 घंटे के भीतर पाइप बिछाने की अनुमति नहीं देता, तो कंपनी उसे मंजूर मानकर काम शुरू कर देगी।
- मरम्मत की जिम्मेदारी: कंपनियां लिखित वचनबद्धता देकर खुद ही सड़क या अन्य ढांचों का पुर्नस्थापन (Restoration) कर सकेंगी।
- निर्बाध कार्य: अब गैस कंपनियों को 24 घंटे काम करने की अनुमति होगी, ताकि कम से कम समय में मोहल्लों तक पाइप पहुँच सके।
PNG vs LPG: क्यों है यह ‘भविष्य की रसोई’?
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खूबी |
LPG (सिलेंडर) |
PNG (पाइप गैस) |
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उपलब्धता |
बुकिंग और वेटिंग का झंझट |
24 घंटे मीटर के साथ उपलब्ध |
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कीमत |
अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर (महंगी) |
स्वदेशी आपूर्ति, काफी किफायती |
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सुरक्षा |
रिसाव का डर और भारी वजन |
बेहद सुरक्षित और प्रभावी |
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कनेक्शन |
लंबी प्रक्रिया |
24 घंटे में नया संपर्क संभव |
इन 18 जिलों में सेवा उपलब्ध, 20 अन्य रडार पर
पटना, गया, बेगूसराय और मुजफ्फरपुर समेत 18 जिलों में ढांचा तैयार है। अब सरकार का फोकस भागलपुर, बांका, दरभंगा, मधुबनी और सीमांचल के जिलों (कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज) पर है, जहाँ तेल कंपनियों के साथ समन्वय कर सघन कार्ययोजना बनाई जा रही है।
VOB का नजरिया: क्या पाइप वाली गैस बनेगी ‘भ्रष्टाचार का दुश्मन’?
विजय कुमार सिन्हा का यह निर्णय बिहार के ‘एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर’ में मील का पत्थर है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि 24 घंटे में अनुमति देने का निर्देश सीधे तौर पर उस लालफीताशाही (Red Tapism) पर चोट है, जहाँ एक पाइप बिछाने के लिए कंपनियां महीनों निकायों के चक्कर काटती थीं।
LPG सिलेंडरों की किल्लत से जूझ रहे बिहार के लिए PNG एक स्थाई समाधान है। “स्वतः मंजूरी” का प्रावधान यह सुनिश्चित करेगा कि अधिकारी जानबूझकर फाइलों को दबा न सकें। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा मानकों की निगरानी और खुदाई के बाद सड़कों की मरम्मत होगी। अगर कंपनियां ‘लिखित वचनबद्धता’ के बाद भी सड़कें ठीक नहीं करतीं, तो ‘जीवन आसान’ होने के बजाय सड़कों पर चलना ‘मुश्किल’ हो जाएगा। सरकार को ‘काम की रफ्तार’ के साथ ‘काम की गुणवत्ता’ का ऑडिट भी सख्त रखना होगा।

