UPSC रिजल्ट विवाद का ‘द एंड’! गाजीपुर की आकांक्षा ही असली अफसर; ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती का दावा निकला फर्जी, आयोग ने जारी की आधिकारिक मुहर

गाजीपुर/नई दिल्ली | 09 मार्च, 2026: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 के नतीजों को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी ‘रैंक वॉर’ पर अब विराम लग गया है। 301वीं रैंक पर दो दावेदारों के बीच उपजे भ्रम को दूर करते हुए UPSC ने सोमवार, 9 मार्च को एक आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी की है। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की रहने वाली आकांक्षा सिंह ही वास्तविक सफल उम्मीदवार हैं, जबकि बिहार के चर्चित चेहरा रहे ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती द्वारा किया जा रहा दावा पूरी तरह तथ्यों से परे और गलत पाया गया है।

असली उम्मीदवार की पहचान: रिकॉर्ड में दर्ज हैं ये तथ्य

​आयोग ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सफल उम्मीदवार का पूरा विवरण सार्वजनिक कर दिया है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के भ्रम की गुंजाइश न रहे।

  • चयनित उम्मीदवार: सुश्री आकांक्षा सिंह।
  • रोल नंबर: 0856794।
  • रैंक: 301 (UPSC CSE 2025)।
  • पता: ग्राम- अभयपुर, जिला- गाजीपुर, उत्तर प्रदेश।
  • पारिवारिक विवरण: पिता का नाम- रंजीत सिंह और माता का नाम- नीलम सिंह।

​UPSC ने अपने पत्र में साफ किया है कि 6 मार्च 2026 को घोषित अंतिम परिणामों के आधार पर केवल इसी पहचान वाली छात्रा को 301वें स्थान पर सफल माना गया है।

दावों और प्रति-दावों का हुआ अंत

​यह विवाद तब गरमाया था जब ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती ने भी इसी समान रैंक (301) पर अपनी सफलता का ढिंढोरा पीट दिया था। सोशल मीडिया और कई स्थानीय मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बधाई संदेशों की बाढ़ आ गई थी, जिससे यह गुत्थी उलझ गई थी कि आखिर असली ‘आकांक्षा’ कौन है।

​आयोग ने स्पष्ट किया कि मीडिया में चल रही दो आकांक्षा सिंह की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। रिकॉर्ड के गहन सत्यापन के बाद यह सिद्ध हो गया कि गाजीपुर की आकांक्षा सिंह ही इस रैंक की वास्तविक हकदार हैं। इस स्पष्टीकरण के बाद अब दूसरे पक्ष द्वारा किए जा रहे दावों की हवा निकल गई है।

VOB का नजरिया: ‘डिजिटल वाहवाही’ की होड़ और जिम्मेदारी!

​यूपीएससी जैसी गरिमामयी परीक्षा के परिणामों पर इस तरह का फर्जी दावा करना न केवल अनैतिक है, बल्कि उन गंभीर छात्रों का भी अपमान है जो वर्षों की मेहनत के बाद यहां पहुँचते हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में ‘बिना वेरिफिकेशन’ के किसी को भी बधाई देने और खबरों को वायरल करने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए। आयोग ने समय रहते आधिकारिक मुहर लगाकर एक मेधावी छात्रा (गाजीपुर की आकांक्षा) के सम्मान की रक्षा की है। गाजीपुर की इस बेटी को उसकी इस ऐतिहासिक सफलता पर ‘वॉयस ऑफ बिहार’ परिवार की ओर से ढेर सारी शुभकामनाएं।

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