भागलपुर में चैती छठ की अनुपम छटा; गंगा के पावन तटों पर उमड़ा आस्था का सैलाब, अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को दिया गया पहला अर्घ्य

HIGHLIGHTS: लोक आस्था के महापर्व से सराबोर हुई सिल्क सिटी; गंगा घाटों पर भक्ति और सुरक्षा का संगम, ‘आपदा मित्रों’ ने संभाली कमान

  • महापर्व का आगाज: भागलपुर के विभिन्न गंगा घाटों पर अस्ताचलगामी (डूबते) सूर्य को अर्घ्य देने के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़।
  • पारंपरिक अनुष्ठान: व्रती महिलाओं ने फल, ठेकुआ और पारंपरिक प्रसाद के साथ पूरी श्रद्धा से भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना की।
  • संकल्प और कामना: परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की दीर्घायु और लोक कल्याण के संकल्प के साथ मनाया जा रहा है चैती छठ।
  • प्रशासनिक मुस्तैदी: सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम; प्रमुख घाटों पर ‘आपदा मित्रों’ और पुलिस बल की तैनाती से शांतिपूर्ण रहा आयोजन।
  • VOB इनसाइट: कार्तिक छठ की तरह ही चैती छठ के प्रति भी भागलपुर वासियों में गहरा लगाव और अटूट विश्वास देखने को मिला।

भागलपुर | 25 मार्च, 2026

​लोक आस्था और सूर्य उपासना का महापर्व ‘चैती छठ’ भागलपुर में अपनी पूरी भव्यता के साथ मनाया गया। सिल्क सिटी के विभिन्न गंगा घाटों पर अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य अर्पित करने के लिए आस्था का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि घाटों पर तिल रखने की भी जगह नहीं बची। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, डूबते सूर्य की किरणों के बीच जब व्रती महिलाओं ने गंगा की लहरों में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया, तो पूरा वातावरण ‘कांच ही बांस के बहंगिया’ जैसे पारंपरिक गीतों से गुंजायमान हो उठा।

गंगा घाटों पर भक्ति का सैलाब: विधि-विधान के साथ पूजा

​चैती छठ के तीसरे दिन, यानी संध्या अर्घ्य के अवसर पर बरारी घाट, मुसहरी घाट, खंजरपुर घाट और सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम सहित शहर के तमाम प्रमुख घाटों पर दोपहर बाद से ही व्रतियों का पहुंचना शुरू हो गया था। व्रती महिलाएं पीतल और बांस के सूप में फल, कंद-मूल और शुद्ध घी में बने ‘ठेकुआ’ को सजाकर गंगा जल में प्रवेश किया।

​परिवार की सुख-शांति और संतान की लंबी उम्र की कामना के साथ व्रतियों ने डूबते सूर्य को दूध और जल का अर्घ्य दिया। घाटों पर मौजूद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण का उत्साह भी देखते ही बन रहा था। भागलपुर की गंगा के किनारे आस्था और श्रद्धा का यह दृश्य अद्भुत शांति और ऊर्जा प्रदान करने वाला था।

प्रशासनिक सतर्कता: सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

​महापर्व को लेकर भागलपुर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर दिखा। जिला प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए प्रमुख घाटों पर ‘आपदा मित्रों’ की विशेष तैनाती की थी। ये आपदा मित्र पानी में गहराई और डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए निरंतर गश्त लगाते रहे।

  • पुलिस गश्त: सभी प्रमुख चौराहों और घाटों तक जाने वाले रास्तों पर पुलिस बल की तैनाती रही ताकि भीड़ नियंत्रण सुचारू रूप से हो सके।
  • स्वयंसेवकों का सहयोग: विभिन्न पूजा समितियों और नागरिक संगठनों के स्वयंसेवकों ने भी सफाई और रास्ता दिखाने में प्रशासन का सहयोग किया।
  • स्वास्थ्य सेवा: आपात स्थिति के लिए कुछ संवेदनशील घाटों पर मेडिकल कैंप और एम्बुलेंस की व्यवस्था भी देखी गई।

VOB का नजरिया: क्या चैती छठ अब कार्तिक छठ जितना ही बड़ा हो गया है?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में चैती छठ के प्रति बढ़ता रुझान भागलपुर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है।

  1. आस्था की शक्ति: कड़ी धूप और गर्मी के बावजूद व्रतियों द्वारा 36 घंटे का निर्जला उपवास रखना आस्था की पराकाष्ठा है।
  2. प्रशासनिक सफलता: बिना किसी बड़े हंगामे या हादसे के इतनी बड़ी भीड़ का प्रबंधन करना भागलपुर प्रशासन की एक बड़ी जीत है।
  3. सामाजिक समरसता: छठ एक ऐसा पर्व है जो ऊंच-नीच और जाति-पाति के भेदभाव को मिटाकर सबको एक ही घाट पर खड़ा कर देता है।

सुबह होगा ‘उदीयमान सूर्य’ को अर्घ्य

​चैती छठ का यह अनुष्ठान कल यानी 25 मार्च की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न होगा। इसके बाद व्रती पारण करेंगे और प्रसाद का वितरण किया जाएगा। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस महापर्व के समापन और श्रद्धालुओं की श्रद्धा से जुड़ी हर खबर आप तक पहुँचाता रहेगा।

  • Related Posts

    बिहार दिवस पर उद्योग विभाग के पवेलियन का ‘ग्रैंड फिनाले’; ‘मेड इन बिहार’ ब्रांड ने जीता दिल, सचिव कुंदन कुमार ने कारीगरों और स्टार्टअप्स की थपथपाई पीठ

    Share Add as a preferred…

    Continue reading