HIGHLIGHTS: चौथे चरण की शिक्षक भर्ती में बड़े बदलाव; आवेदन से पहले जान लें नए नियम
- डेडलाइन: मार्च के अंत तक जारी होगा TRE-4 का आधिकारिक विज्ञापन।
- बंपर वैकेंसी: इस चरण में कुल 46,595 पदों पर होगी शिक्षकों की बहाली।
- 38 जिलों का मौका: अब अभ्यर्थियों को 3 के बजाय सभी 38 जिलों का विकल्प चुनने की मिलेगी आजादी।
- अनिवार्य विकल्प: जिला नहीं चुनने वाले अभ्यर्थी रेस से हो जाएंगे बाहर; किसी भी जिले के लिए नहीं होगा चयन।
- ट्रांसफर का झंझट खत्म: भविष्य में तबादलों की समस्या रोकने के लिए ‘अल्फाबेट सिस्टम’ को हटाने की तैयारी।
पटना | 20 मार्च, 2026
बिहार में शिक्षक बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए होली से पहले बड़ी खुशखबरी आ रही है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) चौथे चरण की शिक्षक नियुक्ति (TRE-4) का विज्ञापन इसी महीने के अंत तक जारी करने जा रहा है। ‘हिन्दुस्तान’ अखबार की खबर पर मुहर लगाते हुए आयोग ने साफ कर दिया है कि इस बार भर्ती प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव किए जा रहे हैं, ताकि मेधावी छात्रों को उनके पसंद के जिले में काम करने का बेहतर मौका मिल सके।
जिलावार रिक्तियां और ’38 जिलों’ का नया फॉर्मूला
BPSC के सचिव सत्य प्रकाश शर्मा के अनुसार, शिक्षा विभाग से मिले प्रस्तावों के आधार पर इस बार आवेदन का फॉर्मेट पूरी तरह बदल दिया गया है:
- पसंद की आजादी: पहले अभ्यर्थियों को केवल 3 जिलों का विकल्प मिलता था, जिससे कम अंक वालों को दूर-दराज के जिलों में जाना पड़ता था। अब अभ्यर्थी सभी 38 जिलों को प्राथमिकता के आधार पर भर सकेंगे।
- मेधा सूची का आधार: मेधा सूची (Merit List) और आरक्षण रोस्टर के आधार पर जिला आवंटित किया जाएगा। जिस जिले में जितनी सीट होगी, वहां उसी के अनुसार चयन होगा।
- भूल की कोई जगह नहीं: यदि कोई अभ्यर्थी जिले का विकल्प नहीं चुनता है, तो उसका चयन किसी भी जिले के लिए नहीं किया जाएगा। यानी विकल्प भरना ‘कंपलसरी’ है।
‘अल्फाबेट सिस्टम’ आउट: अब ट्रांसफर में नहीं फंसेगा पेंच
भविष्य की प्रशासनिक दिक्कतों को देखते हुए BPSC एक बड़ा तकनीकी बदलाव कर रहा है। भर्ती प्रक्रिया से ‘अल्फाबेट सिस्टम’ को हटाया जा रहा है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि भविष्य में शिक्षकों के ट्रांसफर (तबादलों) में आने वाली कानूनी और तकनीकी अड़चनें कम होंगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
VOB का नजरिया: क्या ’38 जिलों का विकल्प’ बढ़ाएगा रोजगार की संभावना?
शिक्षक बहाली के चौथे चरण में 46 हजार से ज्यादा पद एक बड़ी संख्या है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि 38 जिलों का विकल्प देना एक ‘गेम-चेंजर’ कदम है। इससे उन अभ्यर्थियों को लाभ होगा जो अपने गृह जिले या उसके आसपास के जिलों में नौकरी करना चाहते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात ‘अल्फाबेट सिस्टम’ को हटाना है। बिहार में शिक्षक अक्सर नियुक्ति के बाद वर्षों तक ट्रांसफर के लिए दफ्तरों के चक्कर काटते हैं। अगर यह नई व्यवस्था सफल रही, तो शिक्षकों को एक स्थिर करियर मिलेगा। हालांकि, 46 हजार पदों के लिए लाखों आवेदन आएंगे, इसलिए अभ्यर्थियों को अपनी तैयारी अब ‘एक्सप्रेस’ मोड में डाल देनी चाहिए क्योंकि विज्ञापन के तुरंत बाद परीक्षा की तारीखों का ऐलान भी संभव है।


