HIGHLIGHTS:
- बड़ी राहत: कल यानी 14 मार्च को पूरे बिहार में ‘राष्ट्रीय लोक अदालत’ का आयोजन।
- स्पेशल फोकस: पटना हाई कोर्ट के आदेश पर ट्रैफिक चालानों के निपटारे के लिए विशेष व्यवस्था।
- लोकेशन: बिहार के सभी जिला व्यवहार न्यायालयों और अनुमंडल न्यायालयों में बैठेंगी बेंच।
- फायदा: आपसी सहमति से मामले खत्म; समय और पैसे दोनों की होगी बचत।
चालान का ‘शॉर्टकट’ समाधान: कल ही निपटाएं अपना पेंडिंग जुर्माना!
पटना: क्या आपकी गाड़ी का भी कोई पुराना चालान पेंडिंग है? क्या कोर्ट के नोटिस के डर से आपकी रात की नींद उड़ी हुई है? तो कल यानी 14 मार्च का दिन आपके लिए किसी ‘वरदान’ से कम नहीं है। बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने पटना हाई कोर्ट के हालिया आदेश (11 मार्च 2026) के बाद कमर कस ली है। कल राज्य के हर कोने में नेशनल लोक अदालत लगेगी, जहाँ आप अपने ट्रैफिक चालान का निपटारा ऑन-स्पॉट करा सकते हैं।
[लोक अदालत डायरी: कहाँ और कब पहुँचना है?]
बिना किसी वकील और लंबी तारीखों के झंझट के, आप सीधे इन जगहों पर पहुँच सकते हैं:
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विवरण |
जानकारी |
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तारीख |
14 मार्च 2026 (शनिवार) |
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कहाँ जाएँ? |
नजदीकी व्यवहार न्यायालय (Civil Court) या अनुमंडल न्यायालय |
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कौन से मामले? |
सभी लंबित ट्रैफिक चालान और समझौते योग्य मामले |
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प्रक्रिया |
आपसी सहमति और समझौते के आधार पर त्वरित फैसला |
पटना हाई कोर्ट का ‘हस्तक्षेप’ और जनता को ‘रिलीफ’
बता दें कि यह विशेष व्यवस्था पटना उच्च न्यायालय द्वारा 11 मार्च को पारित एक महत्वपूर्ण आदेश के मद्देनजर की गई है। अक्सर लोग ट्रैफिक चालान जमा करने के लिए अदालतों के चक्कर काटकर थक जाते हैं, लेकिन लोक अदालत में न्यायिक प्रक्रिया को इतना सरल बना दिया गया है कि आप मिनटों में अपने पुराने मामलों से छुटकारा पा सकते हैं।
“समय और धन दोनों की बचत”— विधिक सेवा प्राधिकरण
प्राधिकरण के सदस्य सचिव ने आम जनता से अपील की है कि वे इस अवसर का लाभ उठाने में देरी न करें।
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- नो पेंडेंसी: लोक अदालत में हुआ फैसला अंतिम होता है और इसकी कहीं अपील नहीं होती, जिससे मामला हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
- पारदर्शिता: यहाँ न कोई रिश्वत का डर है और न ही लंबी फाइलों का बोझ। बस अपनी बात रखें और आपसी सहमति से दंड का निपटारा करें।
VOB का नजरिया: कोर्ट के चक्करों से ‘ब्रेक’ लगाने का सुनहरा मौका!
अक्सर लोग ट्रैफिक चालान को मामूली समझकर छोड़ देते हैं, जो बाद में ‘कानूनी सिरदर्द’ बन जाता है। बिहार के सभी अनुमंडल और व्यवहार न्यायालयों में एक साथ इस आयोजन का होना प्रशासन की एक सराहनीय पहल है। खासकर तब, जब हाई कोर्ट ने खुद इसकी निगरानी की हो। अगर आप भी चालान के जाल में फंसे हैं, तो कल का दिन ‘चप्पल घिसने’ के बजाय ‘मामला रफा-दफा’ करने का है।


