भागलपुर में गूंजा ‘सामाजिक न्याय’ का नारा: भाकपा-माले ने मनाई कर्पूरी ठाकुर की पुण्यतिथि; मुकेश मुक्त बोले- “मनुवादी ताकतों को शिकस्त देना ही जननायक को सच्ची श्रद्धांजलि”

द वॉयस ऑफ बिहार | भागलपुर (18 फरवरी 2026)

​सामाजिक न्याय के पुरोधा और देशरत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की 39वीं पुण्यतिथि (स्मृति दिवस) पर भागलपुर में वामपंथी विचारधारा और सामाजिक न्याय की आवाज बुलंद हुई। भाकपा-माले और एक्टू (AICCTU) के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय मोहनपुर स्थित जगदीश बौधी स्मृति आवास में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका विषय था— ‘सामाजिक न्याय आन्दोलन और जननायक कर्पूरी ठाकुर’

प्रमुख बिंदु: स्मृति दिवस के मायने

  • संकल्प: समतामूलक समाज बनाने के लिए संघर्ष जारी रखने का आह्वान।
  • चेतावनी: सत्ता के संरक्षण में पनप रही ‘मनुवादी विचारधारा’ के खिलाफ एकजुट होने की अपील।
  • भागीदारी: शासन-प्रशासन में सभी वर्गों की आनुपातिक हिस्सेदारी की मांग।

“सामाजिक न्याय के बिना लोकतंत्र अधूरा”

​कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भाकपा-माले के नगर प्रभारी व एक्टू के राज्य सचिव मुकेश मुक्त ने जननायक के विचारों को आज के संदर्भ में बेहद प्रासंगिक बताया।

  • समरसता का पाठ: उन्होंने कहा कि कर्पूरी जी का पूरा जीवन भाईचारा और मानवीय मूल्यों की स्थापना के लिए समर्पित रहा। उनका स्पष्ट मानना था कि सामाजिक न्याय के बिना लोकतंत्र की नींव कभी मजबूत नहीं हो सकती।
  • आनुपातिक भागीदारी: मुकेश मुक्त ने जोर देकर कहा कि देश का सही विकास तभी संभव है जब शासन और प्रशासन के हर क्षेत्र में सभी जातियों और वर्गों की उनकी आबादी के अनुपात में भागीदारी सुनिश्चित हो।

“मनुवादी साजिशों के खिलाफ खड़ा होना होगा”

​अपने संबोधन में मुकेश मुक्त ने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर तीखा हमला बोला।

“आज सत्ता के नशे में चूर साम्प्रदायिक और सामंती ताकतें देश पर फिर से मनुवादी विचारधारा थोपने की साजिश रच रही हैं। समाज में ऊंच-नीच का जहर घोलने वाले फिर से सिर उठा रहे हैं। ऐसे में इन घृणित ताकतों को निर्णायक शिकस्त देना ही कर्पूरी ठाकुर को याद करने का असली मकसद है।”

मुकेश मुक्त, राज्य सचिव, एक्टू

 

इन वक्ताओं ने भी रखे विचार

​विचार गोष्ठी में संगठन के कई वरिष्ठ नेताओं ने अपनी बात रखी:

  • विष्णु कुमार मंडल (नगर सचिव, भाकपा-माले)
  • सुभाष कुमार (राज्य सचिव, असंगठित कामगार महासंघ)
  • ​इसके अलावा मितेश कुमार, सरफराज अंसारी, आनंद ठाकुर, परमानंद यादव और सुनीत झा ने भी सभा को संबोधित किया।

​कार्यक्रम में प्रमिला देवी, सोम राज, रवि कुमार, स्नेहा, गूंजा भारती, जितेंद्र दास, सूरज पोद्दार, मो. सलीम सहित दर्जनों छात्र, युवा और ग्रामीण उपस्थित रहे।

द वॉयस ऑफ बिहार व्यू: कर्पूरी का विचार आज भी प्रासंगिक

​बिहार की राजनीति में कर्पूरी ठाकुर केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं। भाकपा-माले द्वारा आयोजित यह गोष्ठी याद दिलाती है कि भले ही समय बदल गया हो, लेकिन ‘वंचितों को हक’ दिलाने की लड़ाई अभी बाकी है। जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति को न्याय नहीं मिलता, कर्पूरी ठाकुर का सपना अधूरा ही माना जाएगा।

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