
HIGHLIGHTS: रसोई गैस संकट पर 5 बड़े अपडेट
- अपील: केंद्र सरकार ने देशवासियों से LPG के किफायती इस्तेमाल और विकल्पों (जैसे बिजली या केरोसिन) पर शिफ्ट होने को कहा।
- खपत में भारी गिरावट: मार्च के पहले 15 दिनों में LPG की मांग 17.7% तक गिरकर 11.47 लाख टन रह गई है।
- बिहार अलर्ट: बिहार समेत 9 राज्यों ने कमर्शियल LPG के आवंटन के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए।
- विकल्प: मांग कम करने के लिए राज्यों को 48,000 किलो लीटर केरोसिन का अतिरिक्त कोटा अलॉट किया गया।
- पाइपलाइन पर जोर: सरकार ने राज्यों से ‘सिटी गैस पाइपलाइन’ के पेंडिंग कामों को तुरंत पूरा करने को कहा है।
नई दिल्ली/पटना | 18 मार्च, 2026
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सीधा असर अब आपकी रसोई तक पहुंच गया है। हालांकि भारत के पास कच्चा तेल पर्याप्त है, लेकिन LPG (तरल पेट्रोलियम गैस) की स्थिति सरकार के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले दिन चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, इसलिए अब ‘बचत’ ही सबसे बड़ा समाधान है।
जहाज तो आए, पर ‘फिक्र’ बाकी है
LPG लेकर आए दो बड़े पोत— शिवालिक और नंदा देवी— भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुके हैं। लेकिन जब पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा से पूछा गया कि देश के पास कितने दिन का स्टॉक बचा है, तो उन्होंने सीधा जवाब टालते हुए केवल “किफायत बरतने” की सलाह दी।
📊 LPG का ‘गणित’: मार्च का रिपोर्ट कार्ड
अवधि (मार्च 1-15) | कुल खपत (लाख टन) | पिछले वर्ष से तुलना |
|---|---|---|
मार्च 2025 | 13.87 | – |
मार्च 2026 | 11.47 | 17.7% की कमी (↓) |
मंत्रालय के अनुसार, घबराहट (Panic Booking) में कमी आई है और सोमवार को करीब 70 लाख सिलेंडर बुक हुए।
बिहार समेत 9 राज्यों में ‘कमर्शियल’ शक्ति
सरकार ने कमर्शियल (व्यावसायिक) गैस के दुरुपयोग को रोकने के लिए बिहार, गुजरात, दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों को विशेष निर्देश दिए हैं। अब इन राज्यों में कमर्शियल एलपीजी का आवंटन सरकारी गाइडलाइंस के आधार पर ही होगा, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं के हक पर डाका न पड़े।
केरोसिन बना ‘संकटमोचक’
LPG पर निर्भरता घटाने के लिए केंद्र ने राज्यों को 48,000 किलो लीटर अतिरिक्त केरोसिन जारी किया है। इसके अलावा, राज्यों से अनुरोध किया गया है कि वे गैस पाइपलाइन बिछाने वाली कंपनियों को रोड कटिंग और अन्य शुल्कों में छूट दें ताकि घरों तक सीधी गैस पहुंच सके।
VOB का नजरिया: क्या केरोसिन के दौर में लौट रहा है भारत?
पश्चिम एशिया का संकट केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि अब घरेलू भी हो गया है। 21वीं सदी के ‘डिजिटल इंडिया’ में सरकार का केरोसिन (मिट्टी तेल) की ओर लौटने का सुझाव थोड़ा हैरान करता है, लेकिन यह वर्तमान वैश्विक संकट की गंभीरता को दर्शाता है। बिहार जैसे राज्य के लिए, जहाँ बड़ी आबादी ‘उज्ज्वला योजना’ पर निर्भर है, गैस की किल्लत ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ सकती है। हमारी सलाह— ‘पैनिक’ न करें, लेकिन गैस बर्नर की आंच को जरूरत पड़ने पर ही जलाएं।


