HIGHLIGHTS:
- तारीखें तय: 16 मार्च से 19 मार्च 2026 तक दो पालियों में होगी मध्यमा परीक्षा।
- बड़ी संख्या: बिहार भर के 59 केंद्रों पर बैठेंगे 23,612 परीक्षार्थी।
- पारदर्शिता: नकलमुक्त परीक्षा के लिए पर्यवेक्षकों की तैनाती; चेयरमैन मृत्युंजय झा ने दिए सख्त निर्देश।
- रिजल्ट अपडेट: 28 मार्च से मूल्यांकन शुरू; अप्रैल के दूसरे सप्ताह में आ सकता है परिणाम।
संस्कृत बोर्ड का ‘इम्तिहान’ प्लान: शुचिता और अनुशासन पर जोर
पटना: बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड ने वर्ष 2026 की मध्यमा परीक्षा को लेकर अपनी कमर कस ली है। गुरुवार को बोर्ड कार्यालय में अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल मीटिंग हुई, जिसमें परीक्षा के सुचारू और शांतिपूर्ण संचालन के लिए ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार किया गया। बोर्ड का लक्ष्य इस बार परीक्षा को पूरी तरह डिजिटल युग के मानकों के अनुरूप पारदर्शी और कदाचार मुक्त बनाना है।
पर्यवेक्षकों की ‘पैनी नजर’ और कड़े नियम
बोर्ड अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने बैठक में साफ कर दिया कि परीक्षा की शुचिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
- विशेष निगरानी: बोर्ड ने सभी 59 केंद्रों के लिए विशेष पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। ये पर्यवेक्षक अचानक केंद्रों का दौरा करेंगे और गड़बड़ी मिलने पर ऑन-द-स्पॉट कार्रवाई करेंगे।
- केंद्राधीक्षकों को निर्देश: प्रश्नपत्रों की सुरक्षा से लेकर उत्तर पुस्तिकाओं के संकलन तक, हर कदम पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने का निर्देश दिया गया है।
- नकलमुक्त माहौल: अध्यक्ष ने अपील की है कि सभी शिक्षक और अधिकारी सामूहिक प्रयास करें ताकि संस्कृत शिक्षा की गरिमा बनी रहे।
[बैठक में जुटे दिग्गज: कौन-कौन रहा मौजूद?]
इस महत्वपूर्ण बैठक में राजनीति और शिक्षा जगत के कई बड़े चेहरे शामिल हुए:
- श्रीमती निवेदिता सिंह (माननीय विधान पार्षद)
- श्री विनय कुमार चौधरी (माननीय विधायक)
- डॉ. शिवलोचन झा (कुलपति, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि के प्रतिनिधि)
- श्री नीरज कुमार (सचिव, बोर्ड) और श्री उपेन्द्र कुमार (परीक्षा नियंत्रक) के साथ अन्य गणमान्य सदस्य।
मिशन मोड में मूल्यांकन: रिजल्ट की जल्दबाजी
बोर्ड इस बार सत्र को नियमित रखने के लिए काफी गंभीर है। 19 मार्च को परीक्षा खत्म होने के महज 9 दिन बाद यानी 28 मार्च से पटना के दो केंद्रों पर कॉपियों की जांच शुरू हो जाएगी। बोर्ड का लक्ष्य है कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक छात्र अपना रिजल्ट देख सकें, ताकि उन्हें आगे के नामांकन में कोई असुविधा न हो।
VOB का नजरिया: क्या संस्कृत बोर्ड बन पाएगा रोल मॉडल?
बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की यह तत्परता सराहनीय है। 23 हजार से अधिक परीक्षार्थियों के लिए 59 केंद्रों पर पारदर्शी व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती है। लेकिन जिस तरह से परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद मूल्यांकन और अप्रैल में रिजल्ट की योजना बनी है, वह बताता है कि बोर्ड अपनी छवि सुधारने और छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर है। अब असली परीक्षा 16 मार्च को प्रशासन की होगी कि वह ‘नकलमुक्त’ वादे पर कितना खरा उतरता है।


