विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में बोले डीजीपी
पटना | 31 जुलाई 2025: राज्य में मानव तस्करी जैसे संवेदनशील मामलों की रोकथाम में पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पुलिस अधिकारियों को चाहिए कि वे ऐसे मामलों का निपटारा संवेदनशीलता और सजगता से करें। आम लोगों की भी इस दिशा में भागीदारी ज़रूरी है। ये बातें डीजीपी विनय कुमार ने बुधवार को पुलिस मुख्यालय, सरदार पटेल भवन, पटना में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहीं।
कार्यशाला का आयोजन विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर मानव तस्करी और ट्रांसजेंडर मामलों पर केंद्रित विषयों के तहत किया गया था।
बच्चों की तस्करी को बताया विकराल समस्या
डीजीपी ने बताया कि मादक पदार्थों की तस्करी के बाद मानव तस्करी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध है। उन्होंने कहा,
“बिहार में हाल के वर्षों में 150 से अधिक मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। राज्य के सभी जिलों में वर्ष 2013 से एंटी ट्रैफिकिंग यूनिट (ATU) कार्यरत है। यदि कोई बच्चा लगातार तीन माह तक लापता रहता है, तो उसका मामला ATU को सौंप दिया जाता है।”
2018-19 के आंकड़ों का हवाला देते हुए डीजीपी ने बताया कि बिहार में प्रति वर्ष करीब 7,000 बच्चे लापता होते हैं, जिनमें से लगभग 4,000–5,000 बच्चों की बरामदगी हो जाती है, लेकिन 2,000–3,000 बच्चे अब भी गायब रहते हैं। ऐसे बच्चों को भिक्षावृत्ति, जबरन श्रम, यौन शोषण और अन्य अनैतिक गतिविधियों में धकेल दिया जाता है।
‘अस्तित्व’ योजना और पोर्टल से मदद
डीजीपी ने बताया कि मानव तस्करी से प्रभावित बच्चों की पहचान और उन्हें बचाने के लिए वर्ष 2008 में ‘अस्तित्व’ नामक योजना बनाई गई थी, जिसका उद्देश्य बच्चों को अपराधियों के चंगुल से बाहर निकालना है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में सफेदपोश लोग भी तस्करी में संलिप्त पाए जाते हैं, जिनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा रही है।
पीड़ितों की आपबीती और सम्मान समारोह
इस अवसर पर मानव तस्करी से मुक्त कराई गई पीड़िताएं भी कार्यशाला में मौजूद थीं।
समस्तीपुर के खानपुर की रहने वाली रतना ने बताया कि कैसे वह नाराज होकर घर से भागी और स्टेशन पर एक महिला के झांसे में आकर 1 लाख रुपये में तस्कर रोशनी खातून को बेच दी गई। दो साल बाद उसे इस चंगुल से बाहर निकाला गया।
इसी तरह जहानाबाद के मखदूमपुर निवासी अमृत कुमार और गया के चेकरी निवासी सत्येंद्र कुमार ने भी अपनी दर्दभरी कहानियां साझा कीं। इन सभी को डीजीपी ने ‘विक्टिम वैरियर’ के रूप में सम्मानित किया।
उत्कृष्ट कार्य के लिए एसपी सम्मानित
मानव तस्करी के विरुद्ध उत्कृष्ट कार्य करने के लिए रेल एसपी अमृतेंशु शेखर ठाकुर, सारण एसपी डॉ. कुमार आशीष, पटना सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह और रोहतास एसपी रौशन कुमार को भी डीजीपी द्वारा सम्मानित किया गया।
इस मौके पर एडीजी (कमजोर वर्ग) अमित कुमार जैन, एडीजी (सीआईडी) पारसनाथ सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और पुलिसकर्मी मौजूद रहे।


