नदी की डाढ़ ने छीनी मां की ममता: भागलपुर में महिला की मौत, तीन बेटियों का भविष्य अंधेरे में

भागलपुर, 6 अगस्त 2025: भागलपुर जिले के बाथ थाना क्षेत्र अंतर्गत गिरधरपुर गांव से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। 35 वर्षीय लाखों देवी की नदी की डाढ़ में डूबने से मौत हो गई। एक मां की आकस्मिक मृत्यु ने तीन मासूम बेटियों को बेसहारा कर दिया है और अब उनके जीवन पर बड़ा संकट मंडरा रहा है।

बताया गया कि लाखों देवी किसी कार्यवश नदी किनारे गई थीं। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चली गईं। स्थानीय लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन जब तक उन्हें बाहर निकाला गया, बहुत देर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।


पति अलग, कोई सहारा नहीं — अकेले ही लड़ रही थीं जिंदगी की जंग

लाखों देवी का पारिवारिक जीवन पहले से ही मुश्किलों से भरा था। उनके पति रामबालक यादव उनसे अलग रहते थे और कोई स्थायी रोजगार नहीं करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से दयनीय थी, और अब लाखों देवी की मौत ने तीन मासूम बच्चियों को पूरी तरह से निराश्रित कर दिया है।


तीन मासूम बेटियां — आंखों में आंसू, भविष्य पर अंधेरा

लाखों देवी अपने पीछे तीन बेटियों को छोड़ गई हैं। इनमें से कोई स्कूल जाती है तो कोई अब तक गोद में खेलती थी। अब उनके सिर से मां का साया उठ गया है। गांव में हर कोई यही सवाल कर रहा है —
“इन बच्चियों का क्या होगा?”

न कमाने वाला पिता है, न कोई स्थायी सहारा। पढ़ाई, भोजन और परवरिश जैसी बुनियादी जरूरतें अब सबसे बड़ा सवाल बन गई हैं।


“बेटी को नहीं बचा सका…” — टूटे हुए पिता सुरेंद्र यादव की व्यथा

मृतका के पिता सुरेंद्र यादव ने बताया,
“जब मुझे खबर मिली, तो मैं दौड़कर पहुंचा। मेरी बेटी नदी की डाढ़ में डूबी हुई थी। लोगों की मदद से उसे बाहर निकाला और डॉक्टर के पास ले गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।”

उनकी आंखें नम थीं और चेहरे पर ऐसा दुख, जो शब्दों में बयान नहीं हो सकता।


गांव में पसरा मातम, बेटियों के भविष्य के लिए उठ रही आवाजें

इस हादसे ने गांव में शोक की लहर दौड़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को आगे आकर इन बच्चियों की सहायता करनी चाहिए।

स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि बच्चियों की पढ़ाई और देखभाल की सरकारी व्यवस्था की जाए।


जरूरत है मदद की — ताकि एक मां के न होने का दर्द इन बेटियों की पढ़ाई और जिंदगी पर भारी न पड़े

लाखों देवी की मौत सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि एक परिवार की रीढ़ टूट जाने जैसा है। अब यह प्रशासन, समाज और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी बनती है कि इन तीनों बच्चियों की जिंदगी को फिर से संवारने में सहयोग करें।


 

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