बिहार दिवस के मंच पर गूंजी ‘शक्ति’ और ‘देशभक्ति’ की थाप! ACS डॉ. एन विजयलक्ष्मी के भरतनाट्यम ने बांधा समां; श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल हुआ भक्तिमय

HIGHLIGHTS: प्रशासनिक दक्षता और कलात्मक साधना का अद्भुत संगम; चैत्र नवरात्रि के अवसर पर ‘शक्ति आराधना’ से मंत्रमुग्ध हुए दर्शक

  • सांस्कृतिक महाकुंभ: बिहार दिवस 2026 के समापन समारोह के अवसर पर पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन।
  • मुख्य आकर्षण: योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव (ACS) डॉ. एन विजयलक्ष्मी की भरतनाट्यम प्रस्तुति ने दर्शकों को किया भाव-विभोर।
  • शक्ति उपासना: चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर आदि शंकराचार्य रचित ‘श्री राजा राजेश्वरी अष्टकम’, ‘अंबा स्तुति’ और ‘मां दुर्गा स्तुति’ की दी शानदार प्रस्तुति।
  • राष्ट्र वंदन: ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर विशेष समूह नृत्य; केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूर्ण संस्करण का किया गया पाठ।
  • VOB इनसाइट: एक उच्च पदस्थ लोक सेवक का कला के प्रति ऐसा समर्पण बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने में मील का पत्थर है।

पटना | 24 मार्च, 2026

​बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान स्थित श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल मंगलवार की शाम एक आध्यात्मिक और कलात्मक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। बिहार दिवस समारोह के अंतिम दिन आयोजित सांस्कृतिक संध्या में जो दृश्य दिखा, उसने यह सिद्ध कर दिया कि साधना और कर्तव्य साथ-साथ चल सकते हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव (ACS) डॉ. एन विजयलक्ष्मी ने अपने भरतनाट्यम प्रदर्शन से न केवल शास्त्रीय नृत्य की गरिमा बढ़ाई, बल्कि एक कुशल प्रशासक और समर्पित कलाकार का नायाब उदाहरण भी पेश किया।

श्री राजा राजेश्वरी अष्टकम: भक्ति के रस में डूबा सभागार

​चैत्र नवरात्रि के पावन समय को देखते हुए डॉ. विजयलक्ष्मी ने अपनी प्रस्तुति का केंद्र ‘शक्ति आराधना’ को रखा। उन्होंने आदि शंकराचार्य द्वारा रचित ‘श्री राजा राजेश्वरी अष्टकम’ पर आधारित एकल नृत्य पेश किया। उनकी भावपूर्ण भंगिमाओं और पदचाप ने मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों को मंच पर जीवंत कर दिया। इसके बाद ‘अंबा स्तुति’ और ‘मां दुर्गा स्तुति’ की प्रस्तुति ने पूरे सभागार को एक अलौकिक शांति और भक्तिमय वातावरण से भर दिया। दर्शकों ने करतल ध्वनि से इस आध्यात्मिक संगम का स्वागत किया।

VOB डेटा चार्ट: बिहार दिवस 2026 — सांस्कृतिक संध्या के मुख्य बिंदु

  • मुख्य कलाकार: डॉ. एन विजयलक्ष्मी (अपर मुख्य सचिव, योजना एवं विकास विभाग)।
  • कला विधा: भरतनाट्यम (शास्त्रीय नृत्य)।
  • प्रमुख विषय (Themes): शक्ति अराधना (नवरात्रि विशेष) और देशभक्ति।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ का विशेष उपलक्ष्य।
  • आयोजन स्थल: श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल, पटना।
  • पूर्व रिकॉर्ड: राजगीर महोत्सव, बुद्ध महोत्सव और पिछले वर्ष की ‘यशोधरा’ प्रस्तुति के लिए भी ख्याति प्राप्त।

‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ: कला के जरिए राष्ट्रभक्ति का संदेश

​कार्यक्रम का सबसे प्रभावशाली हिस्सा ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में दी गई समूह नृत्य प्रस्तुति रही। डॉ. विजयलक्ष्मी ने स्वयं इसमें सहभागी बनते हुए अन्य कलाकारों का कुशल मार्गदर्शन किया। इस दौरान केंद्र सरकार के प्रोटोकॉल के अनुरूप ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण संस्करण को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। यह प्रस्तुति न केवल कलात्मक रूप से उत्कृष्ट थी, बल्कि इसमें एक लोक सेवक की अपनी राष्ट्र-संस्कृति के प्रति गहरी निष्ठा भी झलक रही थी।

VOB का नजरिया: प्रशासनिक कार्य और कलात्मक साधना का संतुलन

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि डॉ. एन विजयलक्ष्मी का व्यक्तित्व युवा अधिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

  1. कलात्मक निरंतरता: बचपन से नृत्य के प्रति जुड़ाव को प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच भी जीवित रखना यह दर्शाता है कि कला केवल शौक नहीं, बल्कि एक जीवन दृष्टि है।
  2. सांस्कृतिक राजदूत: राजगीर और बुद्ध महोत्सव जैसे मंचों पर उनके प्रदर्शन ने बिहार की छवि को एक ‘सांस्कृतिक हब’ के रूप में निखारा है।
  3. सकारात्मक संदेश: ऐसे आयोजनों से समाज में यह संदेश जाता है कि शास्त्रीय कलाएं हमें अपनी जड़ों से जोड़ती हैं और मानसिक स्पष्टता प्रदान करती हैं।

गरिमामयी समापन और कला का सम्मान

​सांस्कृतिक संध्या में बड़ी संख्या में गणमान्य अतिथि, वरिष्ठ अधिकारी और कला प्रेमी उपस्थित रहे। डॉ. विजयलक्ष्मी की इस प्रस्तुति ने बिहार दिवस के उत्सव को एक नई ऊंचाई और गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम के समापन पर दर्शकों ने खड़े होकर कलाकारों का अभिवादन किया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ राज्य की ऐसी प्रतिभाओं और सांस्कृतिक बदलाव की हर खबर आप तक पहुँचाता रहेगा।

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