सीवान में रील के ‘भूत’ ने ली महिला की जान! एक ही बाइक पर 4 सवार, मोबाइल के चक्कर में ‘यमराज’ बने युवक; घर के बाहर खड़ी नूर निशा को रौंदा

HIGHLIGHTS: बड़हरिया में ‘जानलेवा’ शौक का तांडव; रील बनाने के चक्कर में उजड़ा परिवार

  • दर्दनाक हादसा: बड़हरिया-बरौली मुख्य मार्ग पर तेतहली बाजार के पास रील बना रहे बाइक सवारों ने महिला को कुचला।
  • लापरवाही की हद: एक ही बाइक पर 4 युवक सवार थे और चलते हुए मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे।
  • मृतक: नूर निशा, जो अपने घर के पास खड़ी थीं; अनियंत्रित बाइक ने उन्हें जोरदार टक्कर मारी।
  • लोकेशन: तेतहली बाजार स्थित वारसी खानकाह के समीप गुरुवार की शाम की घटना।

सीवान | 20 मार्च, 2026

​आजकल की ‘डिजिटल दीवानगी’ किस कदर इंसानी जान पर भारी पड़ रही है, इसका जीता-जागता और खौफनाक उदाहरण सीवान के बड़हरिया में देखने को मिला। यहाँ चार युवकों के लिए सोशल मीडिया पर ‘रील’ बनाना एक महिला की मौत का सबब बन गया। कानून और ट्रैफिक नियमों को धता बताकर एक ही बाइक पर चार लोग सवार होकर ‘सिनेमैटिक शॉट’ ले रहे थे, लेकिन कैमरा एंगल के चक्कर में उन्होंने अपनी जिंदगी और सामने खड़ी महिला की जान दांव पर लगा दी।

रील का नशा और ‘कंट्रोल’ से बाहर रफ्तार

​चश्मदीदों और पुलिस के अनुसार, गुरुवार की शाम को यह हादसा तब हुआ जब नूर निशा अपने घर के बाहर शांति से खड़ी थीं:

  • वीडियो के चक्कर में चूके: बाइक सवार युवक मोबाइल से रील रिकॉर्ड करने में इतने मशगूल थे कि उन्हें सामने खड़ी महिला दिखी ही नहीं।
  • ट्रिपल नहीं ‘फोर्थ’ लोडिंग: नियमों के मुताबिक बाइक पर दो से ज्यादा लोग नहीं बैठ सकते, लेकिन यहाँ चार युवक एक ही सवारी पर स्टंट जैसे हालात पैदा कर रहे थे।
  • अनियंत्रित टक्कर: रील बनाने की हड़बड़ी में बाइक लहराई और सीधे महिला से जा टकराई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

VOB का नजरिया: क्या ‘लाइक्स’ और ‘व्यूज’ किसी की जान से ज्यादा कीमती हैं?

​सीवान की यह घटना हमारे समाज के युवाओं के लिए एक कड़ा सबक है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि रील कल्चर अब एक मानसिक बीमारी का रूप ले रहा है। सड़कें आवाजाही के लिए हैं, फिल्म शूटिंग के लिए नहीं।

​एक ही बाइक पर चार सवार होना ही अपने आप में बड़ा अपराध है, ऊपर से मोबाइल के इस्तेमाल ने इस अपराध को ‘हत्या’ में बदल दिया। पुलिस को केवल ‘दुर्घटना’ का केस दर्ज नहीं करना चाहिए, बल्कि ऐसे मामलों में गैर-इरादतन हत्या की कड़ी धाराएं लगानी चाहिए ताकि सोशल मीडिया के ‘शौकीन’ अपनी और दूसरों की जान के साथ खेलना बंद करें। क्या नूर निशा का कसूर सिर्फ इतना था कि वह अपने ही घर के बाहर खड़ी थीं? जिला प्रशासन को रील बनाने वालों के खिलाफ अब ‘स्पेशल अभियान’ चलाने की जरूरत है।

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