बिहार के गांवों में दौड़ेगी ‘सुशासन’ की रफ्तार! 470 नई सड़कों की DPR तैयार; 1108 किमी का बिछेगा महाजाल, अब गड्ढों से मिलेगी आजादी

HIGHLIGHTS: सूबे के दर्जन भर जिलों के लिए ‘महा-प्लान’ तैयार; पगडंडियों के दिन बहुरे, एजेंसियों को भुगतान शुरू

  • बड़ी खबर: बिहार की 470 ग्रामीण सड़कों के निर्माण और जीर्णोद्धार का रास्ता साफ; 1108 किमी लंबी सड़कों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) विभाग को समर्पित।
  • पॉलिसी का असर: ‘ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति 2018’ के तहत 5 साल की मरम्मत अवधि पूरी होने के बाद अब होगा नए सिरे से कायाकल्प।
  • एक्शन मोड: एजेंसियों को मिल गई राशि, अब जल्द जारी होगी निविदा (Tender); डेढ़ से दो साल में काम पूरा करने का लक्ष्य।
  • प्रमुख क्षेत्र: अरेराज, ढाका, बिहारशरीफ और आरा-पीरो कार्य प्रमंडल में सबसे ज्यादा सड़कों की चमक लौटेगी।
  • VOB इनसाइट: केवल सड़कें नहीं बनेंगी, बल्कि ये ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ‘लाइफलाइन’ साबित होंगी।

पटना | 23 मार्च, 2026

​बिहार के ग्रामीण इलाकों के लिए सोमवार की सुबह विकास की एक नई इबारत लेकर आई है। राज्य सरकार ने सूबे के सुदूर क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 1108 किलोमीटर लंबी सड़कों के निर्माण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। ग्रामीण कार्य विभाग ने उन 470 सड़कों की सूची फाइनल कर ली है, जिनका पुनरुद्धार और चौड़ीकरण होना है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, विभागीय अधिकारियों ने डीपीआर (DPR) तैयार करने वाली एजेंसियों को राशि का भुगतान कर दिया है, जिसका सीधा मतलब है कि अब बहुत जल्द बुलडोजर और तारकोल के टैंकर गांवों की ओर कूच करेंगे।

नीति का कमाल: 5 साल की ‘ड्यूटी’ के बाद अब नई ‘वर्दी’ में दिखेंगी सड़कें

​दरअसल, ये सड़कें ‘ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति 2018’ के तहत बनाई गई थीं। इन सड़कों के रख-रखाव की 5 साल की समय सीमा समाप्त हो गई है। अब इन्हें केवल ‘पैच वर्क’ की जरूरत नहीं है, बल्कि विभाग इन्हें जरूरत के अनुसार चौड़ा करने और नए सिरे से बनाने की तैयारी में है। इन सड़कों के बनने से दर्जन भर से अधिक जिलों के लोगों का शहर तक का सफर आसान और समय बचाने वाला होगा।

VOB डेटा चार्ट: किस प्रमंडल को मिला कितना ‘विकास’ का हिस्सा? 

  • अरेराज कार्य प्रमंडल: यहाँ सबसे अधिक 128 सड़कों का निर्माण होगा, जिनकी कुल लंबाई 375 किमी होगी।
  • ढाका कार्य प्रमंडल: इस प्रमंडल में 110 सड़कों का जीर्णोद्धार किया जाएगा, जिसकी लंबाई 290 किमी है।
  • बिहारशरीफ कार्य प्रमंडल: यहाँ 48 सड़कों का रास्ता साफ हुआ है, जिनकी कुल लंबाई 75 किमी है।
  • आरा कार्य प्रमंडल: भोजपुर के इस क्षेत्र में 28 सड़कों का निर्माण होगा, जिसकी लंबाई 42 किमी तय की गई है।
  • पीरो कार्य प्रमंडल: यहाँ 44 सड़कों की किस्मत बदलेगी, जिसकी कुल लंबाई 107 किमी है।

डेढ़ से दो साल की ‘डेडलाइन’ और गुणवत्ता की चुनौती

​विभाग का लक्ष्य स्पष्ट है—अगले 18 से 24 महीनों के भीतर इन सभी 470 सड़कों को जनता को समर्पित कर देना है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, अब अगला कदम निविदा (Tender) जारी करना है।

VOB का नजरिया: बिहार में सड़कें बनना जितनी खुशी की बात है, उतनी ही बड़ी चिंता ‘गुणवत्ता’ की होती है। सुशासन की सरकार में यह सुनिश्चित करना होगा कि तारकोल की परत पहली बारिश में ही न बह जाए। खासकर अरेराज और ढाका जैसे क्षेत्रों में, जहाँ जलजमाव एक समस्या है, वहां जल निकासी के साथ सड़क निर्माण अनिवार्य होना चाहिए।

निष्कर्ष: सुशासन के ‘गियर’ में ग्रामीण बिहार

​114वें बिहार दिवस के ठीक बाद ग्रामीण सड़कों का यह मेगा प्लान यह दर्शाता है कि सरकार का फोकस अब ‘पगडंडी से हाईवे’ तक के सफर को सुगम बनाना है। 1108 किमी का यह जाल न केवल किसानों को मंडी तक पहुँचाएगा, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा और शिक्षा के लिए भी वरदान साबित होगा। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ उम्मीद करता है कि निविदा की प्रक्रिया पारदर्शी होगी और काम समय पर पूरा होगा।

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