समंदर में ‘तेल’ का खेल! अमेरिका ने ईरानी तेल पर से हटाई पाबंदी; ईरान ने सरेआम झुठलाया— “हमारे पास तो कोई तेल बचा ही नहीं, अमेरिका अफवाह फैला रहा है”

HIGHLIGHTS: वैश्विक बाजार में ‘कच्चे तेल’ की नूराकुश्ती; अमेरिका के दांव पर ईरान का पलटवार

  • अमेरिकी दांव: ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने समुद्र में फंसे 140 मिलियन बैरल ईरानी तेल की बिक्री को दी हरी झंडी।
  • डेडलाइन: पाबंदियों में यह ढील 19 अप्रैल 2026 तक ही प्रभावी रहेगी।
  • ईरान का ‘नो’: तेहरान ने कहा— “हमारे पास कोई अतिरिक्त तेल या फंसा हुआ स्टॉक नहीं है, अमेरिका केवल खरीदारों को लुभा रहा है।”
  • महंगाई का झटका: अमेरिका में पेट्रोल $3 से बढ़कर $3.99 प्रति गैलन पहुँचा; कीमतों को गिराने के लिए ट्रंप प्रशासन (या तत्कालीन सरकार) की छटपटाहट।
  • असर: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चौथे सप्ताह में प्रवेश करते ही कच्चे तेल की कीमतों में ‘आग’ लगी।

वाशिंगटन / तेहरान | 22 मार्च, 2026

​दुनिया इस वक्त केवल बारूद के धुएं से ही नहीं, बल्कि ‘ब्लैक गोल्ड’ यानी कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भी झुलस रही है। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिका ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया के विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। कच्चे तेल की बेतहाशा बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए अमेरिका ने अपने ‘दुश्मन’ ईरान के तेल पर से अस्थायी पाबंदी हटा ली है। लेकिन पेंच यह है कि ईरान ने साफ कह दिया है कि उसके पास बेचने के लिए ‘बूंद भर’ भी अतिरिक्त तेल नहीं है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की इस विशेष रिपोर्ट में समझिए क्या है इस ‘ग्लोबल ऑयल पॉलिटिक्स’ के पीछे की पूरी कहानी।

140 मिलियन बैरल का ‘सस्पेंस’: अमेरिका का मास्टरस्ट्रोक या मजबूरी?

​अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक चौंकाने वाला एलान किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने उन जहाजों को अपना तेल बेचने की अनुमति दे दी है जो ईरानी कच्चे तेल के साथ समुद्र में फंसे हुए हैं।

​बेसेंट के अनुसार, इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अचानक 140 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई बढ़ जाएगी, जिससे आसमान छूती कीमतों में गिरावट आएगी।

​”यह अनुमति केवल उन तेल खेपों के लिए है जो पहले से ही रास्ते में (In-transit) हैं। हम ईरान को नए उत्पादन या नई खरीद की अनुमति नहीं दे रहे हैं। हमारा मकसद केवल बाजार में स्थिरता लाना है।” — स्कॉट बेसेंट, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव

 

​अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें युद्ध शुरू होने से पहले $3 प्रति गैलन थीं, जो अब बढ़कर $3.99 हो गई हैं। अमेरिका में बढ़ती महंगाई वहां की सरकार के लिए गले की हड्डी बन गई है, इसलिए यह ‘अस्थायी’ छूट दी गई है।

“हमारे पास तो तेल है ही नहीं”: ईरान ने उड़ाई अमेरिका की हवा

​अमेरिका के इस एलान के कुछ ही घंटों बाद ईरान के तेल मंत्रालय ने जो बयान जारी किया, उसने खलबली मचा दी है। मुंबई स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास के जरिए जारी बयान में ईरान ने दो-टूक कहा कि अमेरिका जिस ‘फंसे हुए तेल’ की बात कर रहा है, वैसा कोई भंडार मौजूद ही नहीं है।

​ईरानी पक्ष का दावा है:

  1. कोई अतिरिक्त स्टॉक नहीं: ईरान के पास अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए समुद्र में फंसा हुआ कोई कच्चा तेल उपलब्ध नहीं है।
  2. मनोवैज्ञानिक युद्ध: ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी ट्रेजरी सचिव का बयान केवल ‘मार्केट सेंटीमेंट’ को कंट्रोल करने की एक कोशिश है ताकि खरीदार डरे नहीं।
  3. विरोध: ईरान ने प्रतिबंधों में ढील देने के इस ‘एकतरफा’ अमेरिकी ड्रामे का कड़ा विरोध किया है।

VOB डेटा चार्ट: ‘ऑयल इकोनॉमी’ पर युद्ध का असर (2026)

मानक

युद्ध से पहले (फरवरी 2026)

वर्तमान स्थिति (22 मार्च 2026)

अमेरिकी पेट्रोल दाम

$3.00 / गैलन

$3.99 / गैलन

ईरानी तेल सप्लाई

पूर्ण प्रतिबंधित

19 अप्रैल तक अस्थायी छूट (अमेरिकी दावा)

उपलब्धता

सामान्य

भारी कमी (युद्ध का चौथा हफ्ता)

मार्केट मूड

स्थिर

अत्यधिक अस्थिर (Volatile)

VOB का नजरिया: बिहार की जेब पर क्या होगा असर?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय ‘नूराकुश्ती’ सीधे तौर पर हमारे और आपके रसोई बजट से जुड़ी है।

  • भारत का रुख: भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अगर अमेरिका का दावा सही है और 140 मिलियन बैरल तेल बाजार में आता है, तो भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर हो सकती हैं। हाल ही में पेट्रोलियम सचिव डॉ. नीरज मित्तल द्वारा कमर्शियल एलपीजी का कोटा 50% बढ़ाना भी इसी वैश्विक किल्लत की ओर इशारा करता है।
  • ईरान की चाल: ईरान शायद अपना तेल ‘डिस्काउंट’ पर या गुपचुप तरीके से पहले ही बेच चुका है, इसलिए वह अब अमेरिका के इस ‘उपकार’ को स्वीकार कर अपनी हार नहीं दिखाना चाहता।
  • खतरा: अगर ईरान का दावा सही है कि तेल है ही नहीं, तो सोमवार को जब ग्लोबल मार्केट खुलेगा, तब कच्चे तेल की कीमतों में ‘महा-विस्फोट’ हो सकता है, जिससे महंगाई का एक नया दौर शुरू होगा।

निष्कर्ष: 19 अप्रैल तक का ‘अल्टीमेटम’

​अमेरिका ने यह ढील केवल 19 अप्रैल तक के लिए दी है। यह केवल एक महीने का वक्त है। अगर इस बीच पश्चिम एशिया का युद्ध नहीं थमा, तो दुनिया को एक बड़े ‘एनर्जी क्राइसिस’ (ऊर्जा संकट) के लिए तैयार रहना होगा। चैती छठ के इस पावन मौके पर जब बिहार के बाजारों में रौनक है, वैश्विक स्तर पर तेल की यह लड़ाई हमारी खुशियों को थोड़ा महंगा जरूर कर सकती है।

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