खबर के मुख्य बिंदु:
- बड़ी हलचल: नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में ‘लॉन्चिंग’ की तैयारी पूरी।
- सीक्रेट मीटिंग: शुक्रवार रात कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर 20 विधायकों के साथ बनाई रणनीति।
- शपथ/सदस्यता: कल यानी रविवार (8 मार्च) को औपचारिक रूप से जदयू की सदस्यता लेंगे निशांत कुमार।
- पहला पड़ाव: सूत्रों का दावा— ऐतिहासिक चंपारण की धरती से शुरू कर सकते हैं अपना राजनीतिक सफर।
पटना: बिहार की सियासत में आज एक नया इतिहास लिखा जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद अब उनके उत्तराधिकारी के रूप में बेटे निशांत कुमार की सक्रियता ने सूबे का सियासी पारा बढ़ा दिया है। शुक्रवार की देर रात पटना में हुई एक ‘हाई-प्रोफाइल’ बैठक ने यह साफ कर दिया है कि जदयू की अगली कमान अब युवा हाथों में होगी। संजय झा के आवास पर हुई इस बैठक में मौजूद विधायकों के उत्साह ने ‘निशांत’ को भविष्य के नेता के रूप में स्वीकार कर लिया है।
संजय झा के घर ‘आधी रात’ का मंथन
शुक्रवार की रात जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा का आवास सत्ता का केंद्र बना रहा।
- विधायकों की मौजूदगी: करीब 20 विधायक निशांत कुमार से मिलने पहुँचे। तस्वीरों में मंत्री श्रवण कुमार, एमएलसी संजय गांधी और युवा विधायकों की फौज (चेतन आनंद, कोमल सिंह, शुभानंद मुकेश आदि) नजर आई।
- रणनीति: बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि कैसे निशांत कुमार को पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं से जोड़ा जाए और उनकी पहली जनसभा कहाँ रखी जाए।
- चंपारण का विकल्प: चर्चा है कि अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत के लिए निशांत कुमार चंपारण को चुन सकते हैं, जो गांधी और नीतीश दोनों के लिए कर्मभूमि रही है।
CM आवास पर हुई ‘अंतिम मुहर’
इससे पहले शुक्रवार को ही मुख्यमंत्री आवास पर जदयू विधानमंडल दल की बैठक हुई थी।
- नीतीश का भरोसा: नीतीश कुमार ने भावुक होते हुए विधायकों से कहा, “मैं आपको छोड़कर कहीं नहीं जा रहा, बस मेरी इच्छा थी इसलिए राज्यसभा जा रहा हूँ।”
- निशांत की एंट्री: इसी बैठक में संजय झा और ललन सिंह ने नीतीश कुमार की सहमति से निशांत कुमार के राजनीति में आने की घोषणा की।
- पोस्टर वॉर: पटना के हर चौराहे पर अब “निशांत कुमार का स्वागत है” वाले पोस्टर और बैनर लग चुके हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा दिख रही है।
त्वरित अवलोकन (Quick Facts)
- सदस्यता ग्रहण: 08 मार्च 2026 (रविवार) दोपहर बाद।
- स्थान: जदयू प्रदेश कार्यालय, पटना।
- समर्थक विधायक: 20 से अधिक विधायकों ने रात की बैठक में हिस्सा लिया।
- प्रस्तावित क्षेत्र: चंपारण (राजनीतिक शुरुआत के लिए)।
- बड़ा बयान: मंत्री श्रवण कुमार ने कहा— “यह केवल मुलाकात थी, लेकिन निशांत जी की भूमिका पर सकारात्मक चर्चा हुई।”
VOB का नजरिया: क्या ‘निशांत’ बनेंगे जदयू के रक्षक?
नीतीश कुमार के दिल्ली जाने की खबरों से जो जदयू कार्यकर्ता मायूस थे, उनके लिए निशांत कुमार एक ‘संजीवनी’ की तरह आए हैं। हालांकि, नीतीश कुमार हमेशा परिवारवाद के खिलाफ रहे हैं, लेकिन पार्टी के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए उन्होंने शायद इस ‘उत्तराधिकार’ को मंजूरी दी है। निशांत कुमार के लिए चुनौती बड़ी है— उन्हें न केवल अपने पिता की विरासत को संभालना है, बल्कि राजद और बीजेपी जैसी आक्रामक पार्टियों के बीच जदयू की जमीन भी बचानी है। क्या चंपारण की धरती से शुरू हुआ यह सफर बिहार को एक नया विकल्प देगा? 2026 की यह सबसे बड़ी राजनीतिक घटना है।


