
- राजधानी पटना की पुलिस ने मोबाइल छिनतई और तस्करी के एक ऐसे नेटवर्क को ध्वस्त किया है, जिसकी जड़ें भारत के पांच राज्यों से लेकर नेपाल की सरहद तक फैली हुई थीं।
- सचिवालय हॉल्ट और भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल में की गई संयुक्त छापेमारी में पुलिस ने 15 लाख रुपये मूल्य के 55 चोरी के मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
- यह गिरोह दिल्ली, ओडिशा, मध्य प्रदेश, झारखंड और बिहार जैसे राज्यों से मोबाइल उड़ाकर उन्हें रक्सौल के ‘सेफ हाउस’ में जमा करता था और वहां से नेपाल के तस्करों को आधी कीमत पर बेच देता था।
- विशेष रूप से आईफोन (Apple) जैसे महंगे ब्रांड्स इस गिरोह की पहली पसंद थे, क्योंकि नेपाल में इनके आईएमईआई (IMEI) ट्रैक होने का खतरा कम रहता है और कीमत अच्छी मिलती है।
- सिटी एसपी (सेंट्रल) दीक्षा के नेतृत्व में सचिवालय डीएसपी-1 की टीम ने इस ‘ऑपरेशन थंडर’ को अंजाम दिया, जिससे अंतरराज्यीय मोबाइल चोरों के बीच हड़कंप मच गया है।
पटना (द वॉयस ऑफ बिहार)।
सरहदों के पार ‘चोरी का व्यापार’: जब पटना पुलिस ने बेनकाब किया अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट
आधुनिक युग में मोबाइल फोन केवल संचार का साधन नहीं, बल्कि इंसान की डिजिटल तिजोरी बन चुका है। इसी तिजोरी पर हाथ साफ करने वाले एक ऐसे गिरोह का खुलासा पटना पुलिस ने किया है, जिसका कार्यक्षेत्र किसी एक मोहल्ले या शहर तक सीमित नहीं था। यह गिरोह पेशेवर तरीके से एक ‘कॉरपोरेट चेन’ की तरह काम कर रहा था। एक तरफ छिनतई करने वाले शूटर थे, तो दूसरी तरफ लॉजिस्टिक्स संभालने वाले लोग और अंत में अंतरराष्ट्रीय खरीदार। मंगलवार की रात सचिवालय हॉल्ट के पास से शुरू हुई पुलिसिया कार्रवाई बुधवार की सुबह रक्सौल के एक बंद मकान तक जा पहुंची, जहाँ ‘डिजिटल लूट’ का माल सरहद पार जाने का इंतजार कर रहा था।
सचिवालय हॉल्ट पर बिछी खाकी की बिसात: रंगे हाथों पकड़े गए दो ‘कैरियर’
घटनाक्रम की शुरुआत मंगलवार की रात उस समय हुई जब सचिवालय डीएसपी-1 को एक गुप्त सूचना मिली कि दो संदिग्ध युवक भारी मात्रा में चोरी के मोबाइल लेकर ट्रेन पकड़ने की फिराक में हैं। सिटी एसपी दीक्षा के निर्देश पर आनन-फानन में एक विशेष टीम का गठन किया गया और सचिवालय हॉल्ट की घेराबंदी की गई। पुलिस ने जब दो युवकों को घेरा, तो उन्होंने भागने की नाकाम कोशिश की। उनकी तलाशी लेने पर एक साधारण से दिखने वाले बैग के भीतर से 22 मोबाइल फोन बरामद हुए। पकड़े गए बदमाशों की पहचान कदमकुआं के रवि कुमार और वैशाली के रौशन कुमार के रूप में हुई। शुरुआती पूछताछ में ही उन्होंने जो राज उगले, उसने पुलिस के होश उड़ा दिए।
रक्सौल का ‘कंट्रोल रूम’: आधी रात के बाद सीमा पर पुलिसिया स्ट्राइक
गिरफ्तार रवि और रौशन ने खुलासा किया कि यह तो केवल ‘ट्रेलर’ है, असली खेप पूर्वी चंपारण के रक्सौल में छिपाई गई है। पुलिस की एक टीम तुरंत सादे लिबास में रक्सौल के लिए रवाना हुई। बुधवार की सुबह जब पटना पुलिस ने रक्सौल बाजार के एक संदिग्ध मकान पर धावा बोला, तो वहां साजन कुमार और आदित्य कुमार नामक दो अन्य बदमाश पुलिस के हत्थे चढ़े। वहां से 33 और मोबाइल फोन बरामद किए गए। रक्सौल का यह मकान इस गिरोह का ‘ट्रांजिट पॉइंट’ था। यहाँ देशभर से चोरी किए गए फोनों को डंप किया जाता था और मौका मिलते ही उन्हें सीमा पार नेपाल में बैठे हैंडलर्स को सौंप दिया जाता था।
पांच राज्य और एक गिरोह: छिनतई की ‘नेशनल’ चेन
पूछताछ के दौरान यह तथ्य सामने आया कि यह गिरोह केवल बिहार तक सीमित नहीं था। पकड़े गए शातिरों ने स्वीकार किया कि वे दिल्ली के भीड़भाड़ वाले बाजारों, मध्य प्रदेश के रेलवे स्टेशनों, ओडिशा के बस स्टैंडों और झारखंड के शहरी इलाकों में छिनतई (Snatching) की वारदातों को अंजाम देते थे। गिरोह का तरीका बहुत ही पेशेवर था। वे उन फोनों को प्राथमिकता देते थे जिनकी रीसेल वैल्यू ज्यादा हो। बरामद 55 फोनों में कई हाई-एंड स्मार्टफोन्स शामिल हैं, जिनकी कुल बाजार कीमत करीब 15 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस अब इन फोनों के आईएमईआई नंबर के जरिए उनके असली मालिकों की तलाश कर रही है ताकि उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस लौटाया जा सके।
क्यों था ‘नेपाल’ इनका पसंदीदा बाजार?
सुरक्षा विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों के अनुसार, चोरी के मोबाइल नेपाल भेजने के पीछे एक बड़ी तकनीकी वजह है। भारत में चोरी हुए फोन अगर भारतीय सिम कार्ड के साथ इस्तेमाल किए जाएं, तो उन्हें ‘सर्विलांस’ और ‘लोकेशन ट्रैकिंग’ के जरिए पकड़ना आसान होता है। लेकिन सरहद पार होते ही भारतीय दूरसंचार नियमों और ट्रैकिंग सिस्टम की सीमाएं समाप्त हो जाती हैं। नेपाल में ये फोन आधी कीमत पर आसानी से बिक जाते हैं और वहां इन्हें ट्रैक करना भारतीय पुलिस के लिए लगभग नामुमकिन हो जाता है। विशेष रूप से एप्पल (Apple) के फोन, जो भारत में ‘ब्लॉक’ कर दिए जाते हैं, उनके पार्ट्स नेपाल और अन्य देशों के बाजारों में काफी महंगे बिकते हैं।
गिरफ्तार बदमाशों की कुंडली: स्थानीय अपराधी और अंतरराज्यीय नेटवर्क
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए चारों बदमाशों का प्रोफाइल यह बताता है कि वे कम समय में अमीर बनने की चाहत में अपराध की दुनिया में शामिल हुए थे।
- रवि कुमार: पटना के कदमकुआं का रहने वाला, जो गिरोह के लिए पटना में ‘कलेक्शन’ का काम देखता था।
- रौशन कुमार: वैशाली के शाहपुर का निवासी, जो मोबाइल को एक शहर से दूसरे शहर ले जाने में माहिर था।
- साजन और आदित्य कुमार: पूर्वी चंपारण के मोतिहारी के रहने वाले, जिनका काम रक्सौल बॉर्डर पर नेपाली तस्करों से डील करना और माल की सुरक्षित डिलीवरी सुनिश्चित करना था।
सिटी एसपी दीक्षा का बयान और भविष्य की रणनीति
सिटी एसपी (मध्य) दीक्षा ने मीडिया को बताया कि यह पटना पुलिस के लिए एक बड़ी कामयाबी है। उन्होंने कहा, “सचिवालय डीएसपी-1 के नेतृत्व में टीम ने बेहतरीन समन्वय दिखाया। यह गिरोह न केवल चोरी करता था, बल्कि एक संगठित तरीके से तस्करी का नेटवर्क चला रहा था। हमने इनके पास से 15 लाख का माल बरामद किया है।” सिटी एसपी ने यह भी संकेत दिया कि पुलिस अब उस नेपाली सिंडिकेट की पहचान करने की कोशिश कर रही है जो इन चोरों से माल खरीदता था। इसके लिए बॉर्डर सिक्योरिटी और संबंधित एजेंसियों के साथ भी सूचनाएं साझा की जा रही हैं।
आम जनता के लिए सबक: डिजिटल सुरक्षा के प्रति रहें सजग
यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। गिरोह के सदस्यों ने बताया कि वे अक्सर उन लोगों को निशाना बनाते थे जो फोन पर बात करते हुए या कान में हेडफोन लगाकर सड़क पार करते थे। पुलिस ने अपील की है कि अगर किसी का मोबाइल चोरी होता है, तो वह तुरंत एफआईआर दर्ज कराए और ‘CEIR’ (Central Equipment Identity Register) पोर्टल पर अपना फोन ब्लॉक करे, ताकि चोर उसे भारत में इस्तेमाल न कर सकें।
निष्कर्ष: सरहद पर चौकसी और पुलिस की जीत
पटना से रक्सौल तक फैले इस ऑपरेशन ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी से अपना ठिकाना बदल लें, कानून के हाथ उन तक पहुँच ही जाते हैं। मोबाइल चोरों का यह गिरोह अब जेल की सलाखों के पीछे है, लेकिन डिजिटल तस्करी का यह खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। भारत-नेपाल सीमा पर होने वाली इस तरह की तस्करी को रोकने के लिए और भी कड़े तकनीकी और जमीनी उपायों की आवश्यकता है। फिलहाल, 55 फोनों की बरामदगी उन 55 परिवारों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जिनका कीमती डेटा और यादें इन शातिरों ने छीन ली थीं। पटना पुलिस की यह कार्रवाई सुशासन और अपराध मुक्त बिहार की दिशा में एक ठोस कदम है।


