HIGHLIGHTS: समाज को झकझोर देने वाली वारदात में न्याय की जीत; पीड़िता को 8 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश, सख्त सजा से अपराधियों में खौफ
- कड़ी सजा: जहानाबाद पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के दोषी पिता को 20 वर्ष के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई।
- आर्थिक दंड: कोर्ट ने दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया; जुर्माना न भरने पर 6 माह की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
- बड़ी राहत: पीड़िता के पुनर्वास के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार को 8 लाख रुपये मुआवजा देने का कड़ा निर्देश।
- ऐतिहासिक फैसला: विशेष पॉक्सो न्यायाधीश सुनील कुमार सिंह ने साक्ष्यों के आधार पर महज दो साल के भीतर सुनाया फैसला।
- VOB इनसाइट: पिता-पुत्री के पवित्र रिश्ते को कलंकित करने वाले इस मामले में बुआ की साहसी शिकायत ने आरोपी को सलाखों के पीछे पहुँचाया।
जहानाबाद | 25 मार्च, 2026
बिहार के जहानाबाद जिले से न्याय की एक ऐसी मिसाल सामने आई है जो रिश्तों को तार-तार करने वाले अपराधियों के लिए एक बड़ा सबक है। अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ हैवानियत करने वाले एक पिता को कानून ने उसके किए की सबसे कड़ी सजा दी है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश सह विशेष पॉक्सो न्यायाधीश सुनील कुमार सिंह ने इस संवेदनशील मामले में त्वरित सुनवाई करते हुए दोषी पिता को 20 साल की कठोर जेल की सजा सुनाई है।
शकूराबाद कांड: बुआ की दिलेरी से खुला था राज
मामला शकूराबाद थाना क्षेत्र का है, जहाँ नवंबर 2023 में मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली यह वारदात सामने आई थी। एक पिता, जिस पर अपनी बेटी की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही उसका भक्षक बन गया।
- शिकायत: 7 नवंबर 2023 को पीड़िता की बुआ ने हिम्मत दिखाते हुए शकूराबाद थाने में अपने ही भाई (दोषी पिता) के खिलाफ लिखित आवेदन दिया था।
- त्वरित कार्रवाई: पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
- न्यायिक प्रक्रिया: कोर्ट ने गवाहों के बयान और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पिता को अपनी ही संतान के साथ यौन शोषण का दोषी पाया।
VOB डेटा चार्ट: जहानाबाद पॉक्सो कोर्ट का फैसला—एक नजर में
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श्रेणी |
न्यायिक आदेश का विवरण |
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मुख्य न्यायाधीश |
श्री सुनील कुमार सिंह (विशेष पॉक्सो न्यायाधीश) |
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दोषी की सजा |
20 वर्ष का कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) |
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आर्थिक जुर्माना |
₹20,000 (जुर्माना न देने पर 6 माह की अतिरिक्त सजा) |
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पीड़िता को मुआवजा |
₹8,00,000 (आठ लाख रुपये) |
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घटना की तिथि |
मामला 7 नवंबर 2023 को दर्ज हुआ था |
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संबंधित थाना |
शकूराबाद थाना क्षेत्र, जहानाबाद |
मुआवजा और पुनर्वास: पीड़िता के भविष्य की चिंता
कोर्ट ने केवल सजा ही नहीं सुनाई, बल्कि पीड़िता के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि उसे 8 लाख रुपये का मुआवजा तत्काल उपलब्ध कराया जाए। यह राशि पीड़िता के शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक पुनर्वास में सहायक सिद्ध होगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि का मुआवजा यह दर्शाता है कि न्यायालय बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रहा है।
VOB का नजरिया: क्या ऐसे कड़े फैसलों से रुकेंगे घरेलू अपराध?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि यह फैसला उन तमाम ‘कलयुगी’ मानसिकता वाले लोगों के लिए एक चेतावनी है जो घर की चारदीवारी के भीतर अपराध को अंजाम देते हैं।
- बुआ की मिसाल: इस केस में पीड़िता की बुआ ने समाज और परिवार के दबाव को दरकिनार कर अपनी भतीजी के लिए न्याय मांगा। सामाजिक बुराइयों के खिलाफ ऐसी जागरूकता ही बदलाव लाएगी।
- न्याय में तेजी: 2023 के अंत में दर्ज मामले का मार्च 2026 में फैसला आना यह दर्शाता है कि पॉक्सो कोर्ट्स अब त्वरित न्याय सुनिश्चित कर रहे हैं।
- मुआवजे का महत्व: 8 लाख रुपये की सहायता राशि एक पीड़िता को आत्मनिर्भर बनाने और समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए प्रशासन की सकारात्मक पहल है।
सुशासन और ‘न्याय का शासन’
जहानाबाद कोर्ट का यह फैसला समाज के उन तत्वों को संदेश देता है कि कानून की नजर से कोई नहीं बच सकता, चाहे वह घर का मुखिया ही क्यों न हो। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस साहसी फैसले का स्वागत करता है और पीड़िता के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।


