भागलपुर शहर के ठीक पीछे बसे शंकरपुर दियारा समेत सात गाँव आज भी मूलभूत सुविधाओं के गंभीर अभाव से जूझ रहे हैं। करीब 20 हजार आबादी वाला यह पूरा क्षेत्र हर साल गंगा नदी के कटाव और बाढ़ के कारण शहर से कट जाता है। भागलपुर विश्वविद्यालय के समानांतर बहने वाली गंगा की एक धारा इस इलाके को पूरी तरह अलग-थलग कर देती है।
लोगों की शहर तक आवाजाही का एकमात्र साधन नावें हैं, जो रोज़ाना हजारों यात्रियों को नदी पार कराती हैं। लेकिन यह सफर न तो सुरक्षित है और न ही सुविधाजनक।
गर्भवती महिलाओं और मरीजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती
गाँव के सरपंच दिनेश बताते हैं कि सबसे ज्यादा मुश्किलें—
- गर्भवती महिलाओं
- और गंभीर रूप से बीमार मरीजों
को उठानी पड़ती हैं।
रात में प्रसव पीड़ा आने या किसी आपातकालीन स्थिति में नाव चालक नदी में उतरने से हिचकते हैं, क्योंकि अंधेरा और पानी का तेज बहाव दुर्घटना का खतरा बढ़ा देता है।
कई बार इलाज के अभाव में नहीं, बल्कि नाव समय पर नहीं मिलने के कारण लोगों की जान तक चली गई है।
दियारा इलाका हर साल बाढ़ की गंभीर मार झेलता है, जिसमें 25 हजार से अधिक लोग प्रभावित होते हैं।
ग्रामीणों का सहारा था चचरी पुल, इस साल नहीं जुट सका फंड
शंकरपुर दियारा के लोग वर्षों से नाव के साथ-साथ चचरी पुल पर निर्भर रहे हैं।
यह पुल हर वर्ष ग्रामीणों द्वारा चंदा जुटाकर बनवाया जाता था, जिससे आवागमन काफी हद तक आसान हो जाता था।
लेकिन साल 2025 में चचरी पुल के निर्माण के लिए पर्याप्त राशि नहीं जुट पाई, जिसके कारण—
- स्कूली बच्चों
- महिलाओं
- नौकरीपेशा लोगों
को नाव के इंतज़ार में रोज़ाना घंटों बिताने पड़ रहे हैं।
नदी किनारे लगी नावों की लंबी कतारें
जब रिपोर्टिंग टीम मौके पर पहुँची तो नदी किनारे नावों की लंबी कतारें दिखाई दीं।
छोटे-छोटे बच्चे टिफिन और स्कूल बैग लिए अपनी बारी का इंतज़ार करते दिखे।
महिलाएँ दैनिक जरूरतों के लिए मजबूरी में हर दिन जोखिम उठाते हुए नदी पार करती हैं।
करीब दो किलोमीटर के क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक नावें किसी तरह आवागमन बनाए हुए हैं, लेकिन बढ़ती भीड़ के सामने यह पर्याप्त नहीं है।
स्थायी पुल का वादा अब भी अधूरा
ग्रामीण मिथलेश बताते हैं—
“जिला प्रशासन ने यहाँ पक्का पुल बनाने का वादा तीन साल पहले किया था, लेकिन न तो अब तक काम शुरू हुआ और न ही कोई पहल दिखती है।”
स्थिति इतनी खराब है कि करीब 5,000 लोग रोज़ाना शहर आने-जाने को मजबूर हैं, वह भी ऐसे सफर में जहाँ हर दिन किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों की प्रशासन से मांग — तुरंत बनें स्थायी पुल
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि प्रशासन—
- पक्के पुल निर्माण की दिशा में तत्काल कदम उठाए
- दियारा क्षेत्र के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करे
- नाव संचालन पर उचित नियंत्रण और निगरानी रखे
लोगों का कहना है कि स्थायी पुल बनने से—
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- रोजगार
- खेती
- और बाजार आवागमन
सब आसान हो जाएगा और बाढ़ के समय होने वाली परेशानियाँ भी काफी हद तक समाप्त हो जाएँगी।
नदी के सहारे चल रही जिंदगी
शंकरपुर दियारा के 20 हजार लोगों की जिंदगी आज भी नदी और नाव पर ही टिकी है।
जब तक स्थायी पुल का निर्माण नहीं होता, तब तक इनकी रोजमर्रा की जिंदगी जोखिम, इंतज़ार और असुविधा के बीच घिरी रहेगी


