HIGHLIGHTS:
- शर्मनाक वारदात: खतौली में 1.5 साल की दूधमुंही बच्ची को बनाया हवस का शिकार।
- त्वरित न्याय: वारदात के चंद घंटों के भीतर पुलिस ने आरोपी को मुठभेड़ में किया ढेर; पैर में लगी गोली।
- मोडस ऑपरेंडी: बिस्कुट दिलाने के बहाने दुकान ले गया था आरोपी।
- बरामदगी: आरोपी के पास से तमंचा और कारतूस बरामद; पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई।
बिस्कुट के बहाने ‘शिकार’ और खाकी का ‘प्रहार’
मुजफ्फरनगर: यूपी के मुजफ्फरनगर से एक ऐसी वारदात सामने आई है जिसने कलेजा कंपा दिया है। खतौली क्षेत्र में एक शख्स ने डेढ़ साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। लेकिन योगी की पुलिस ने भी ‘जीरो टॉलरेंस’ का परिचय देते हुए गुरुवार रात करीब 8:30 बजे आरोपी को मुठभेड़ के बाद सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। आरोपी ने भागने के लिए पुलिस पर गोलियां भी चलाईं, लेकिन जवाबी कार्रवाई में उसे पैर में गोली लगी और वह दबोच लिया गया।
मां की चीख और पुलिस की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
मामला तब सामने आया जब पीड़िता की मां बदहवास हालत में खतौली थाने पहुंची।
शिकायत के अंश: “एक व्यक्ति मेरी बच्ची को बहला-फुसलाकर बिस्कुट दिलाने के बहाने दुकान पर ले गया और वहां उसके साथ घिनौना काम किया।”
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत टीमें तैनात कीं। चेकिंग के दौरान जब पुलिस का सामना आरोपी से हुआ, तो उसने सरेंडर करने के बजाय फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में आरोपी घायल हो गया, जिसके बाद उसे तुरंत गिरफ्तार कर अस्पताल भेजा गया।
पॉक्सो एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट और हत्या के प्रयास (पुलिस पर फायरिंग) जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। मासूम बच्ची को मेडिकल परीक्षण के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भेजा गया है, जहां डॉक्टर उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रभारी निरीक्षक के नेतृत्व में इस त्वरित कार्रवाई ने इलाके में पुलिस का इकबाल बुलंद किया है।
VOB का नजरिया: दरिंदगी पर ‘एनकाउंटर’ का इंसाफ!
डेढ़ साल की बच्ची के साथ ऐसी वारदात समाज के माथे पर कलंक है। मुजफ्फरनगर पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कानून और पुलिस की गोलियां दोनों तैयार हैं। सवाल यह है कि आखिर समाज में ऐसी विकृत मानसिकता वाले लोग कैसे पनप रहे हैं जो बिस्कुट के बहाने मासूमों का सौदा करते हैं? ऐसे अपराधियों को समाज में रहने का कोई हक नहीं है।


