पटना: बिहार में शराबबंदी को लेकर सियासी बहस थमने का नाम नहीं ले रही है। एक बार फिर विधानसभा में इस कानून की समीक्षा की मांग उठी है, जिस पर सत्तारूढ़ दल जेडीयू ने कड़ा रुख अपनाया है।
दरअसल, बिहार विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक दल के नेता माधव आनंद ने शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री Nitish Kumar समय-समय पर अपने फैसलों की समीक्षा करते रहे हैं, ऐसे में शराबबंदी कानून की भी समीक्षा होनी चाहिए।
माधव आनंद ने कहा कि वे विनम्रतापूर्वक यह जानना चाहते हैं कि शराबबंदी से राज्य को क्या फायदे और नुकसान हुए हैं। इसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ा है और जागरूकता के स्तर पर क्या बदलाव आया है—इन सभी बिंदुओं की समग्र समीक्षा की जानी चाहिए।
जेडीयू ने दिया जवाब
विधानसभा के अंदर उठी इस मांग पर जेडीयू ने सदन के बाहर प्रतिक्रिया दी। पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा कि मुख्यमंत्री पहले भी शराबबंदी की समीक्षा करते रहे हैं। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि सदन में समीक्षा की मांग के पीछे असल मंशा क्या है, यह संबंधित विधायक ही स्पष्ट कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर कोई समीक्षा के नाम पर बिहार में शराबबंदी खत्म कराना चाहता है तो यह संभव नहीं है। सरकार इस कानून को आगे भी सख्ती से लागू करती रहेगी।
दिल्ली का जिक्र कर साधा निशाना
जेडीयू प्रवक्ता ने बयान में दिल्ली का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी लागू है, लेकिन दिल्ली में ऐसा नहीं है। जो लोग लगातार दिल्ली आते-जाते रहते हैं, वे वहां की व्यवस्था से भली-भांति परिचित हैं।
जेडीयू के इस बयान को राजनीतिक हलकों में अपने ही गठबंधन के विधायक पर इशारों में तंज के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि बिहार में शराबबंदी पर कोई समझौता नहीं होगा।


