पटना: बिहार विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया। इसी दौरान शिक्षकों के वेतन और भत्तों में कथित विसंगति का मामला सदन में जोरदार तरीके से उठाया गया। इस पर शिक्षा मंत्री सुनील कुमार को जवाब देना पड़ा।
एक ही स्कूल में तीन तरह के शिक्षक: अजय कुमार
अजय कुमार, जो समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर से विधायक हैं, ने सदन में कहा कि राज्य के एक ही विद्यालय में तीन अलग-अलग श्रेणी के शिक्षक कार्यरत हैं—नियोजित शिक्षक, विशिष्ट शिक्षक और बीपीएससी के माध्यम से नियुक्त शिक्षक।
उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षकों को मिलने वाले वेतन और भत्तों में भारी अंतर है। कुछ शिक्षकों को किराया भत्ता (HRA) मिलता है, तो कुछ को नहीं। वहीं, जिन्हें मिलता भी है, उन्हें अलग-अलग दरों पर—किसी को 10 प्रतिशत, किसी को 8 प्रतिशत और किसी को 4 प्रतिशत दिया जाता है।
विधायक ने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले सभी शिक्षकों को समान रूप से एचआरए दिया जाएगा या नहीं।
मंत्री ने विसंगति दूर करने का किया दावा
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने जवाब देते हुए कहा कि सदस्य की बात सही है कि एक ही स्कूल में अलग-अलग श्रेणी के शिक्षक कार्यरत हैं, लेकिन सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि वेतन, एचआरए या अन्य भत्तों में किसी प्रकार की विसंगति न रहे।
उन्होंने बताया कि किराया भत्ता की दरें पांच अलग-अलग श्रेणियों में निर्धारित हैं। अधिकांश जिलों में वेतन और एचआरए से संबंधित विसंगतियों को दूर कर लिया गया है। मंत्री के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत समस्याओं का समाधान हो चुका है, जबकि शेष 10 प्रतिशत मामलों को भी जल्द सुलझा लिया जाएगा।
इस मुद्दे पर सदन में कुछ समय तक चर्चा होती रही और विपक्ष ने शिक्षकों को समान सुविधा देने की मांग दोहराई।


