भोजपुर में नीलगाय का बढ़ता आतंक, गेहूं-मटर की फसल तबाह, किसान बेहाल

भोजपुर। जिले के बड़हरा प्रखंड क्षेत्र में नीलगाय का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बधार इलाकों में नीलगाय दिन-रात खेतों में घुसकर किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं। खासकर गेहूं और मटर की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है, जिससे किसान गंभीर संकट में आ गए हैं।

कई पंचायतों में किसानों की मुश्किलें बढ़ीं

बड़हरा प्रखंड के बलुआ, नरगदा, सोहरा, नथमलपुर, नेकनाम टोला, पूर्वी गुण्डी, गजियापुर, बखोरापुर, एकवना, बबुरा, विशुनपुर और बभनगांवा समेत कई गांवों में नीलगाय खेतों को लगातार नुकसान पहुंचा रही हैं। किसानों का कहना है कि रोजाना फसल बर्बाद हो रही है और मेहनत पर पानी फिर रहा है।

गेहूं और मटर की फसल को भारी नुकसान

नूरपुर गांव के किसान कौशल सिंह ने बताया कि नीलगाय खेतों में घुसकर गेहूं और मटर की फसल चर जाती हैं और मेड़ तोड़ देती हैं। कई मामलों में पूरी फसल नष्ट हो जा रही है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

दिनदहाड़े भी खेतों में पहुंच रहीं नीलगाय

नेकनाम टोला के किसान अनिल सिंह ने कहा कि नीलगाय झुंड बनाकर खेतों में घुसती हैं, जिससे फसलों के साथ-साथ खेतों की मेड़ भी टूट जाती है। चातर गांव के सुमंत हर्षवर्धन ने बताया कि पहले नीलगाय शाम या रात में आती थीं, लेकिन अब दिन के समय भी खेतों में पहुंच रही हैं, जिससे खेतों की रखवाली करना मुश्किल हो गया है।

“नीलगायों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गेहूं और मटर की फसल पर सबसे ज्यादा मार पड़ रही है। सरकार की फसल क्षति से जुड़ी योजनाएं यहां प्रभावी नहीं हो पा रही हैं।” — किसान

मुआवजे और स्थायी समाधान की मांग

किसानों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि नीलगाय के हमलों से फसलों को बचाने के लिए ठोस और स्थायी समाधान निकाला जाए। साथ ही फसल क्षति पर मिलने वाले मुआवजे और राहत योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि किसानों की आजीविका सुरक्षित रह सके।


 

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