- बुढ़ापे की लाठी बनी पुलिस: एसपी शुभांक मिश्रा ने शुरू किया ‘द्वार पर पुलिस’ अभियान; अब घर बैठे सुनी जाएंगी दादा-दादी की समस्याएं
- सुखिया कटसरी से शुरुआत: महिला थानाध्यक्ष कल्याणी कुमारी ने घर-घर जाकर जाना बुजुर्गों का हाल; कहा- ‘हम हैं आपके बच्चे’
- डायल-112 का नया अवतार: महीने में दो बार खुद हाल जानने पहुंचेगी गाड़ी; अकेले रहने वाले बुजुर्गों की बन रही लिस्ट
द वॉयस ऑफ बिहार (शिवहर)
आमतौर पर पुलिस का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर या सख्ती का भाव आता है, लेकिन शिवहर पुलिस (Sheohar Police) ने इस धारणा को बदलते हुए संवेदनशीलता की एक नई मिसाल पेश की है। जिले के पुलिस कप्तान (SP) शुभांक मिश्रा की पहल पर बुजुर्गों के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया गया है। अब जिले के 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को अपनी फरियाद लेकर थाने के चक्कर नहीं काटने होंगे, बल्कि पुलिस खुद उनके दरवाजे पर पहुंचकर उनका हाल-चाल जानेगी।
डायल-112: सिर्फ इमरजेंसी नहीं, इमोशन भी
एसपी शुभांक मिश्रा ने बताया कि इस अभियान का मुख्य जरिया ERSS (डायल-112) होगा।
- सुविधा: 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक किसी भी समस्या के लिए सीधे 112 नंबर डायल कर सकते हैं। सूचना मिलते ही पुलिस वाहन उनके घर पहुंचेगा और मौके पर ही समस्या का समाधान करेगा।
- नियमित संपर्क: सिर्फ शिकायत पर ही नहीं, बल्कि डायल-112 की टीम महीने में कम से कम 1 से 2 बार खुद अपनी तरफ से बुजुर्गों के घर जाकर या फोन पर उनका कुशलक्षेम पूछेगी।
सुखिया कटसरी में दिखा पुलिस का अपनापन
इस अभियान का आगाज भी हो चुका है। एसपी के निर्देश पर महिला थानाध्यक्ष कल्याणी कुमारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सुखिया कटसरी गांव का दौरा किया। टीम ने वहां के वरिष्ठ नागरिकों से आत्मीयता से मुलाकात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि पुलिस हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।
अकेले रहने वालों की सुरक्षा प्राथमिकता
ग्रामीण इलाकों में पलायन के कारण कई बुजुर्ग दंपत्ति या विधवा/विधुर अकेले रहते हैं। उनके बच्चे रोजगार के सिलसिले में बाहर हैं, जिससे वे सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील हो जाते हैं।
- डेटाबेस: पुलिस अब ऐसे अकेले रहने वाले बुजुर्गों की सूची (Database) तैयार कर रही है, ताकि अपराधी उन्हें निशाना न बना सकें और मेडिकल इमरजेंसी में भी उन्हें तुरंत मदद मिल सके।
- निर्देश: एसपी ने सभी थानाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि बुजुर्गों की समस्याओं का समाधान ‘टॉप प्रायोरिटी’ पर होना चाहिए।


