80 मजदूरों की ‘खून-पसीने की कमाई’ पर डाका; ₹15 लाख के बकाये को लेकर थाने पहुंचे पीड़ित, 2 साल से काट रहे चक्कर

अकबरनगर/भागलपुर | 27 फरवरी, 2026: विकास की राह प्रशस्त करने वाले मजदूरों के खुद के घर में अंधेरा है। भागलपुर के अकबरनगर क्षेत्र के करीब 80 मजदूरों का लगभग 15 लाख रुपये का मेहनताना पिछले ढाई साल से फंसा हुआ है। अपनी रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे इन मजदूरों ने गुरुवार को अकबरनगर थाने का घेराव किया और पुलिस से न्याय की गुहार लगाई। मजदूरों का आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें केवल आश्वासन का झुनझुना थमाया जा रहा है।

पंजाब से बिहार तक… मेहनत यहां, पैसा कहां?

​मजदूरों की व्यथा केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। उनके बकाये का हिसाब दो हिस्सों में बंटा है:

  • पंजाब प्रोजेक्ट (₹12.77 लाख): मजदूरों ने बताया कि उन्हें पंजाब में नेशनल हाईवे (NH) निर्माण के लिए ले जाया गया था। वहां ‘जेके’ (JK) नाम की कंपनी के ठेकेदार विशाल के अधीन दो महीने तक कड़ी मशक्कत की, लेकिन भुगतान के नाम पर आज भी हाथ खाली हैं।
  • अकबरनगर प्रोजेक्ट (₹2.30 लाख): स्थानीय स्तर पर चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य में भी मजदूरों का बकाया शेष है।

भवनाथपुर प्लांट पर काम ठप, पुलिस पर दबाव का आरोप

​भुगतान न होने से नाराज मजदूरों ने भवनाथपुर स्थित निर्माण प्लांट पर पिछले दो दिनों से काम बंद कर दिया है।

  • मजदूरों का दर्द: प्रिंस कुमार, सुबोध कुमार और अभिषेक कुमार सहित अन्य मजदूरों ने आरोप लगाया कि जब वे अपनी वाजिब मजदूरी के लिए विरोध करते हैं या काम बंद करते हैं, तो स्थानीय पुलिस द्वारा उन पर काम शुरू करने के लिए अनुचित दबाव बनाया जाता है।
  • आश्वासन का खेल: मजदूरों का कहना है कि पहले विरोध करने पर कुछ राशि दे दी जाती थी, लेकिन अब केवल तारीखें दी जा रही हैं।

कंपनी और पुलिस का पक्ष

​घोरघट से दोगच्छी तक सड़क चौड़ीकरण का कार्य करा रही कंपनी MGCPPL के डीपीएम मानव चौधरी ने सफाई देते हुए कहा:

​”मजदूर अलग-अलग ठेकेदारों और कंपनियों से जुड़े हैं, जिससे समन्वय में देरी हुई। हमने भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी है और फिलहाल 4 लाख रुपये दिए गए हैं। शेष राशि भी जल्द दे दी जाएगी।”

 

​वहीं, अकबरनगर थानाध्यक्ष राहुल कुमार ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है, लेकिन अब तक मजदूरों की ओर से कोई लिखित आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। लिखित शिकायत मिलते ही पुलिस कानूनी कार्रवाई करेगी।

VOB का नजरिया: क्या ‘विकास’ की नींव मजदूरों के शोषण पर खड़ी होगी?

एक ओर सरकार बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं सड़कों को बनाने वाले मजदूर अपने बच्चों के निवाले के लिए तरस रहे हैं। ढाई साल का लंबा वक्त किसी भी मजदूर के सब्र को तोड़ने के लिए काफी है। प्रशासन को चाहिए कि वह केवल लिखित आवेदन का इंतजार न करे, बल्कि श्रम विभाग के साथ मिलकर इस मामले में हस्तक्षेप करे ताकि मजदूरों को उनकी मेहनत का हक मिल सके।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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