HIGHLIGHTS: नशे के जाल में फंसता बचपन, पुलिस की सख्ती को मिला ‘जन-समर्थन’
- नशे का केंद्र: बुढ़िया नदी, सिंहनान रोड और गंगटा पोखर के पास ब्राउन शुगर के बढ़ते कारोबार से इलाके में खौफ।
- दारोगा को समर्थन: ग्रामीणों ने SI विकास कुमार को बताया ‘कर्तव्यनिष्ठ’; मारपीट के आरोपों को बताया नशा तस्करों की ‘साजिश’।
- बड़ी मांग: SSP और डीएसपी से पूरे इलाके में सघन ‘सर्च ऑपरेशन’ चलाने की गुहार।
- किशोरों पर खतरा: गांव वालों की चिंता—नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं स्कूली बच्चे; पुलिस की कार्रवाई ही एकमात्र रास्ता।
भागलपुर | 19 मार्च, 2026
भागलपुर के जगदीशपुर इलाके में इन दिनों ‘वर्दी’ और ‘नशे के सौदागरों’ के बीच सीधी जंग छिड़ी हुई है। एक तरफ जहाँ कुछ लोग पुलिस पर सख्ती के आरोप लगा रहे हैं, वहीं गाँव के आम लोगों और महिलाओं ने पुलिस का ढाल बनकर खड़े होने का फैसला किया है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि ब्राउन शुगर का जहर उनके बच्चों की नसों में उतर रहा है, और इसे रोकने के लिए ‘डंडे’ का इस्तेमाल गलत नहीं है।
“मारपीट नहीं, यह तो साजिश है!” — ग्रामीणों की दहाड़
जगदीशपुर थाने के एसआई विकास कुमार द्वारा की गई हालिया छापेमारी के बाद उन पर मारपीट के आरोप लगे थे। लेकिन ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ की पड़ताल में कहानी कुछ और ही निकली:
- तस्करों का दांव: ग्रामीणों के अनुसार, 13 मार्च की छापेमारी में जब मुख्य आरोपी भाग निकला, तो पुलिस को बदनाम करने के लिए ‘मारपीट’ की झूठी कहानी रची गई ताकि कार्रवाई रुक जाए।
- सराहनीय पहल: इलाके की महिलाओं ने खुलकर कहा कि विकास कुमार जैसे निडर अधिकारी ही समाज को नशामुक्त बना सकते हैं।
VOB का नजरिया: क्या ‘ब्राउन शुगर’ के किले को ढहा पाएगी पुलिस?
जगदीशपुर की यह स्थिति केवल एक थाने का मामला नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। जब किशोर बच्चे ब्राउन शुगर जैसी जानलेवा लत का शिकार होने लगें, तो पुलिस की ‘नरमी’ घातक साबित हो सकती है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि भागलपुर SSP प्रमोद कुमार यादव को ग्रामीणों की ‘सर्च ऑपरेशन’ वाली मांग को गंभीरता से लेना चाहिए। पुलिस पर आरोप लगना कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब जनता खुद पुलिस के समर्थन में सड़क पर उतरे, तो समझ लेना चाहिए कि पानी सिर से ऊपर जा चुका है। अब बारी पुलिस कप्तान की है—क्या वे जगदीशपुर को इस ‘सफेद जहर’ से आज़ाद कराएंगे?


