HIGHLIGHTS: चैत्र नवरात्रि पर शक्तिपीठ में उमड़ा जनसैलाब; मन्नत पूरी होने पर ‘दीपदान’ की अनोखी परंपरा
- दिव्य नजारा: सासाराम स्थित माँ ताराचंडी धाम के दीप कक्ष में प्रज्वलित हैं शुद्ध घी के हजारों अखंड दीपक।
- प्राचीन मान्यता: मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु करते हैं नौ दिनों का दीपदान; वर्षों से अटूट है यह परंपरा।
- विशेष सुरक्षा: अखंड दीपों की 24 घंटे देखरेख के लिए मंदिर समिति ने नियुक्त किए विशेष पुजारी।
- प्राकृतिक सौंदर्य: कैमूर पहाड़ी की गुफाओं में विराजी माँ के दर्शन को बिहार ही नहीं, दूसरे राज्यों से भी पहुँच रहे भक्त।
सासाराम (रोहतास) | 21 मार्च, 2026
चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर बिहार का ऐतिहासिक शहर सासाराम भक्ति के रंग में सराबोर है। कैमूर पर्वत श्रृंखला की गोद में स्थित माँ ताराचंडी धाम में इन दिनों एक ऐसा दृश्य देखने को मिल रहा है जो किसी को भी विस्मित कर दे। गुफा मंदिर के भीतर हजारों अखंड दीपों की लौ न केवल अंधेरे को चीर रही है, बल्कि लाखों भक्तों की अटूट आस्था को भी रोशन कर रही है।
मनोकामना की लौ: क्यों खास है यहाँ का ‘दीपदान’?
श्रद्धालुओं का मानना है कि माँ ताराचंडी के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता।
- आस्था की ज्योति: श्रद्धालु कशिष राज और रोहित कुमार के अनुसार, जब भक्तों की मन्नतें पूरी होती हैं, तो वे यहाँ नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाते हैं।
- शुद्ध घी का अर्पण: दीप कक्ष में रखे हजारों दीयों में केवल शुद्ध घी का उपयोग होता है, जिसकी सुगंध से पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है।
पुजारी का संदेश: सेवा में समर्पित ‘दिन-रात’
मंदिर के पुजारी गौरीशंकर गिरी बताते हैं कि इन अखंड दीपों की मर्यादा बनाए रखना एक बड़ी जिम्मेदारी है।
”अखंड दीप बुझने न पाए, इसके लिए विशेष रूप से पंडितों की नियुक्ति की गई है जो बारी-बारी से सेवा देते हैं। साथ ही, इन दीपों को जलाने वाले यजमानों के नाम पर विशेष पूजा और कल्याण की कामना भी की जाती है।”
VOB का नजरिया: क्या ‘परंपरा’ और ‘आस्था’ ही हैं बिहार की असली पहचान?
रोहतास के माँ ताराचंडी धाम की यह परंपरा केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि श्रद्धा का वह चरम है जहाँ ‘अंधकार’ पर ‘प्रकाश’ की जीत का साक्षात अनुभव होता है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि पहाड़ी की गुफा में हजारों दीयों का जलना आधुनिक चकाचौंध के बीच हमारी प्राचीन जड़ों की मजबूती को दर्शाता है।
अक्सर खबरों में अपराध और राजनीति की चर्चा होती है, लेकिन ताराचंडी धाम का यह शांत और दिव्य माहौल बताता है कि बिहार की आत्मा आज भी अपनी लोक-संस्कृति और देव-आस्था में रची-बसी है। मंदिर प्रशासन की व्यवस्था और भक्तों का अनुशासन इस शक्तिपीठ की गरिमा को और बढ़ाता है। अगर आप शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की तलाश में हैं, तो नवरात्रि के ये नौ दिन सासाराम की इन पहाड़ियों में बिताने लायक हैं।


