HIGHLIGHTS
- फर्जी दावा: शेखपुरा के रंजीत यादव ने UPSC में 440वीं रैंक लाने का किया था झूठा दावा।
- बड़ी भूल: बिना जांच किए इलाके के पूर्व विधायक और महुली थानाध्यक्ष ने भी रंजीत को किया था सम्मानित।
- सच्चाई: 440वीं रैंक असल में कर्नाटक के रंतीथ कुमार आर को मिली है, रंजीत ने केवल नाम का फायदा उठाया।
- गिरफ्तारी: एसडीपीओ डॉ. राकेश कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने ‘कॉलेज मोड़’ से फर्जी टॉपर को दबोचा।
शेखपुरा | 16 मार्च, 2026
बिहार के शेखपुरा से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने ‘अंधी वाहवाही’ और ‘सोशल मीडिया के दिखावे’ की पोल खोलकर रख दी है। महज एक सप्ताह पहले जिस युवक को पूरा गांव अपना भविष्य का आईएएस मानकर पलकों पर बिठा रहा था, आज वह सलाखों के पीछे अपनी करतूतों का हिसाब दे रहा है। महुली थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव निवासी रंजीत यादव का ‘UPSC टॉपर’ बनने का ढोंग आखिरकार बेनकाब हो गया है।
ढोल-नगाड़े, माला और ‘पूर्व विधायक’ का सम्मान
रंजीत यादव ने सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैलाई कि उसने देश की सबसे प्रतिष्ठित यूपीएससी परीक्षा में 440वीं रैंक हासिल की है। यह खबर जंगल की आग की तरह फैली। गांव में जश्न का माहौल बन गया, मिठाइयां बांटी गईं और रंजीत को फूल-मालाओं से लाद दिया गया। हद तो तब हो गई जब इलाके के पूर्व विधायक और खुद महुली थानाध्यक्ष रामप्रवेश भारती भी बिना सत्यापन किए उसे आईएएस मानकर सम्मानित करने पहुंच गए।
ऐसे खुली ‘फर्जी टॉपर’ की पोल
सफलता का यह गुब्बारा ज्यादा दिन तक नहीं टिक सका। जब इस ‘सफलता’ की गहराई से पड़ताल की गई, तो पता चला कि UPSC की मेरिट लिस्ट में 440वें स्थान पर रंजीत यादव नहीं, बल्कि कर्नाटक के रंतीथ कुमार आर का नाम दर्ज है। रंजीत ने केवल मिलता-जुलता नाम होने का फायदा उठाकर पूरे जिले को गुमराह किया था।
पुलिस का एक्शन: कॉलेज मोड़ से सीधा जेल
सच्चाई सामने आते ही शेखपुरा पुलिस हरकत में आई। एएसपी डॉ. राकेश कुमार के निर्देश पर महुली थाना और डीआईओ (DIO) की टीम ने संयुक्त छापेमारी की। फर्जी टॉपर रंजीत यादव को शहर के कॉलेज मोड़ से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया गया है।
VOB का नजरिया: बिना वेरिफिकेशन ‘हीरो’ बनाने की जल्दी भारी पड़ी!
यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सबक है। शेखपुरा का यह मामला दिखाता है कि कैसे लोग सोशल मीडिया के दावों पर बिना किसी सरकारी दस्तावेज या सत्यापन के भरोसा कर लेते हैं। उससे भी ज्यादा चिंताजनक यह है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी इस झांसे में आ गए। रंजीत ने न केवल एक असली मेधावी छात्र की मेहनत का अपमान किया, बल्कि अपने गांव और जिले की साख को भी धक्का पहुँचाया है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि झूठ के पहिए ज्यादा दूर तक नहीं चलते।


