अंग जनपद की गूँज संसद की दहलीज तक: आकाशवाणी और दूरदर्शन के डिजिटल कलेवर से बदलेगी भागलपुर की तस्वीर; अंगिका और संथाली को मिला बड़ा मंच, ओटीटी ‘वेव्स’ और मोबाइल ऐप पर अब कहीं भी उपलब्ध होंगी स्थानीय धुनें

लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर यानी संसद में जब किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक और सूचनात्मक विरासत की बात होती है, तो उस क्षेत्र के विकास को एक नई संजीवनी मिलती है। 1 अप्रैल 2026 को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल ने एक महत्वपूर्ण अतारांकित प्रश्न (संख्या 6080) के माध्यम से जिले में आकाशवाणी और दूरदर्शन सेवाओं की वर्तमान स्थिति और उनके डिजिटल भविष्य को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। इस प्रश्न के उत्तर में सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने जो विवरण प्रस्तुत किया, वह भागलपुर और पूरे अंग क्षेत्र के लिए सूचना क्रांति के एक नए अध्याय का संकेत है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भागलपुर में अब केवल पारंपरिक रेडियो प्रसारण ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक डिजिटल स्टूडियो और ग्लोबल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

आकाशवाणी भागलपुर: आधुनिकता और परंपरा का संगम

​भागलपुर में आकाशवाणी सेवाओं की तकनीकी स्थिति को लेकर केंद्र सरकार ने विस्तार से जानकारी दी है। वर्तमान में आकाशवाणी भागलपुर एक 20 किलोवाट मीडियम वेव और एक 100 वॉट एफएम ट्रांसमीटर के माध्यम से अपनी पहुंच सुनिश्चित कर रहा है। प्रसारण की गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए आकाशवाणी भागलपुर को पूर्णतः डिजिटल स्टूडियो व्यवस्था से सुसज्जित किया गया है। प्रसारण के समय की बात करें, तो यह स्टेशन प्रतिदिन प्रातः 5:50 बजे से शुरू होकर रात्रि 11:20 बजे तक सक्रिय रहता है, जो कुल मिलाकर 17 घंटे और 20 मिनट का प्रसारण समय होता है।

​इस प्रसारण समय का वर्गीकरण भी काफी रोचक है। कुल समय में से 12 घंटे 32 मिनट तक स्टेशन द्वारा निर्मित मूल और स्थानीय कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है, जबकि शेष 4 घंटे 48 मिनट रिले कार्यक्रमों के लिए आरक्षित होते हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि आकाशवाणी भागलपुर स्थानीयता को प्राथमिकता दे रहा है, जिससे क्षेत्रीय मुद्दों और प्रतिभाओं को अधिक अवसर मिल रहे हैं।

छह भाषाओं का अनूठा गुलदस्ता और क्षेत्रीय प्रतिभाओं का पोषण

​भागलपुर का आकाशवाणी केंद्र केवल एक सूचना केंद्र नहीं, बल्कि एक भाषाई और सांस्कृतिक सेतु भी है। यहाँ कार्यक्रमों का प्रसारण हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत, संथाली और विशेष रूप से अंगिका बोली में किया जाता है। अंगिका और संथाली को मुख्यधारा के प्रसारण में स्थान मिलना इस क्षेत्र की जनजातीय और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके माध्यम से स्थानीय कलाकारों, संगीतकारों, लेखकों और प्रस्तुतकर्ताओं को अपनी कला के प्रदर्शन के लिए एक सशक्त मंच प्राप्त हो रहा है। सरकार का मानना है कि ये प्रयास न केवल पारंपरिक कला रूपों को लुप्त होने से बचाएंगे, बल्कि उभरती हुई ग्रामीण प्रतिभाओं को भी सही मार्गदर्शन और अवसर प्रदान करेंगे, जिससे सामुदायिक जुड़ाव और अधिक सुदृढ़ होगा।

डीडी बिहार: भागलपुर की विरासत का डिजिटल आईना

​दूरदर्शन सेवाओं के संदर्भ में सरकार ने बताया कि पटना स्थित दूरदर्शन केंद्र से प्रसारित होने वाला ‘डीडी बिहार’ चैनल भागलपुर सहित पूरे बिहार की कला, संस्कृति, साहित्य, इतिहास और परंपराओं के लिए समर्पित है। यह चैनल 24 घंटे सातों दिन संचालित होता है और भागलपुर की सांस्कृतिक विरासत और यहाँ के विशिष्ट व्यक्तित्वों से संबंधित विशेष कार्यक्रमों का निर्माण एवं प्रसारण करता है। स्थानीय प्रतिभाओं को शामिल करके क्षेत्रीय सामग्री तैयार करना दूरदर्शन की प्राथमिकता सूची में शामिल है, जिससे भागलपुर के कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है।

डिजिटल विस्तार: अब जेब में होगा आकाशवाणी और दूरदर्शन

​बदलते दौर में सूचनाओं तक पहुंच के तरीके भी बदल गए हैं। सरकार ने भागलपुर की जनता के लिए डिजिटल विकल्पों का द्वार खोल दिया है। “न्यूज़ ऑन एयर” मोबाइल ऐप, जो एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है, उस पर बिहार के 7 आकाशवाणी चैनलों के साथ-साथ आकाशवाणी भागलपुर को भी लाइव सुना जा सकता है। इसके अलावा, विविध भारती, रागम और लाइव न्यूज़ जैसे 260 से अधिक चैनल अब इंटरनेट के माध्यम से भागलपुर के लोगों की पहुंच में हैं।

​दूरदर्शन की फ्री-टू-एयर (डीटीएच) सेवा भी एक बड़ा वरदान साबित हो रही है। “डीडी फ्री डिश” के माध्यम से भागलपुर के दर्शक बिना किसी मासिक शुल्क या सब्सक्रिप्शन फीस के डीडी बिहार सहित सभी प्रमुख चैनलों का आनंद ले सकते हैं। यह सेवा विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सूचना और मनोरंजन का एक किफायती माध्यम बनी हुई है।

ओटीटी प्लेटफॉर्म ‘वेव्स’: मनोरंजन का नया वैश्विक पता

​प्रसार भारती ने वर्ष 2024 में डिजिटल दुनिया में कदम बढ़ाते हुए अपना स्वयं का ओटीटी प्लेटफॉर्म “वेव्स” (Waves) प्रारंभ किया है। यह प्लेटफॉर्म सूचना, शिक्षा और संस्कृति को एक ही स्थान पर एकीकृत करता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डीडी बिहार और आकाशवाणी नेटवर्क के विभिन्न चैनलों को “वेव्स” ओटीटी के साथ जोड़ दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि अब भागलपुर का कोई भी कलाकार या वहां का कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम दुनिया के किसी भी कोने में इंटरनेट के माध्यम से देखा या सुना जा सकेगा। यह इन्फोटेनमेंट सामग्री के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी पहल है।

सामुदायिक रेडियो: स्थानीय आवाजों को वित्तीय और तकनीकी संबल

​सामुदायिक रेडियो स्टेशनों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार “भारत में सामुदायिक रेडियो अभियान को सहायता” नामक एक विशेष केंद्रीय क्षेत्र की स्कीम चला रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य नए और मौजूदा सामुदायिक रेडियो स्टेशनों को संसाधनों और अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से सुदृढ़ करना है। विशेष रूप से भागलपुर जैसे क्षेत्रों के दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों में सामाजिक-आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए इस स्कीम के तहत निम्नलिखित घटकों के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है:

  • ​अत्याधुनिक प्रसारण उपकरणों की खरीद या पुराने उपकरणों का प्रतिस्थापन।

  • ​सामुदायिक रेडियो संचालकों का क्षमता निर्माण और उन्हें आधुनिक पत्रकारिता का प्रशिक्षण प्रदान करना।

  • ​क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कार्यशालाओं और सम्मेलनों का आयोजन, जिससे ज्ञान और अनुभवों का साझाकरण हो सके।

​इसके साथ ही, सरकार ने “नेविगेट भारत” पोर्टल पर एक विशेष ‘सामग्री साझाकरण प्लेटफॉर्म’ विकसित किया है। यह प्लेटफॉर्म विभिन्न सामुदायिक रेडियो स्टेशनों को अपनी गुणवत्तापूर्ण सामग्री अपलोड करने और एक-दूसरे के कार्यक्रमों का पुनः उपयोग करने में सक्षम बनाता है। इससे सांस्कृतिक और विकासात्मक सामग्री का एक विशाल केंद्रीकृत भंडार तैयार हो रहा है, जो ग्रामीण विकास की प्रक्रियाओं में स्थानीय समुदायों की भागीदारी को सुनिश्चित कर रहा है।

सांसद की पहल और भविष्य की उम्मीदें

​संसद में भागलपुर की इन सेवाओं पर चर्चा होने के बाद सांसद अजय कुमार मंडल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इन पहलों का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि “न्यूज़ ऑन एयर” ऐप और “वेव्स” ओटीटी जैसे प्लेटफॉर्म भागलपुर की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि भविष्य में इन सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने और सामुदायिक रेडियो के नेटवर्क को जिले के कोने-कोने तक पहुंचाने की आवश्यकता है। भागलपुर के मा. सांसद द्वारा उठाए गए इन मुद्दों और केंद्र सरकार के सकारात्मक जवाब से यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में अंग जनपद की आवाज डिजिटल इंडिया के नक्शे पर और अधिक मजबूती से चमकेगी।

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