भागलपुर | 09 मार्च, 2026: देश की सबसे बड़ी सांख्यिकीय कवायद— ‘भारत की जनगणना 2027’— को लेकर भागलपुर में प्रशासनिक सक्रियता तेज हो गई है। सोमवार को भागलपुर समाहारणालय के समीक्षा भवन में जनगणना के प्रथम चरण के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर इस 6 दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत की, जिसमें जिले के आला अधिकारियों को जनगणना की बारीकियों से रूबरू कराया जा रहा है।
प्रथम चरण: ‘मकान सूचीकरण’ पर फोकस
जनगणना 2027 का पहला और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव ‘मकानों की सूची’ तैयार करना है।
- ट्रेनिंग का उद्देश्य: जिला, नगर निगम और चार्ज ऑफिसर स्तर के शासकीय सेवकों को मकानों के सूचीकरण (House Listing) और मकानों की गणना (House Census) के लिए प्रशिक्षित करना।
- कार्यविधि: इस 6 दिवसीय प्रशिक्षण में अधिकारियों को डेटा कलेक्शन के नए नियमों, डिजिटल एंट्री और जमीनी चुनौतियों से निपटने के तरीके सिखाए जाएंगे।
प्रशासनिक अमले की मौजूदगी
इस कार्यक्रम में जिले के लगभग सभी महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुख शामिल हुए, जो यह दर्शाता है कि प्रशासन इस मिशन को कितनी गंभीरता से ले रहा है।
- प्रमुख उपस्थिति: उप विकास आयुक्त (DDC) श्री प्रदीप कुमार सिंह, नगर आयुक्त श्री किसलय कुशवाहा, कहलगांव अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) श्री कृष्णचंद्रगुप्त।
- अन्य अधिकारी: अपर समाहर्ता श्री दिनेश राम और अपर समाहर्ता (विधि-व्यवस्था) श्री राकेश रंजन सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रशिक्षण?
जनगणना केवल लोगों की गिनती नहीं है, बल्कि यह अगले एक दशक के लिए सरकार की विकास योजनाओं, संसाधनों के आवंटन और नीतियों के निर्धारण का आधार होती है। मकान सूचीकरण के दौरान ही यह तय होता है कि किस क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कितनी आवश्यकता है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पूरी सटीकता और पारदर्शिता के साथ इस कार्य को संपन्न करें, क्योंकि एक छोटी सी त्रुटि बड़े डेटा को प्रभावित कर सकती है।
VOB का नजरिया: डिजिटल युग में ‘सटीक गणना’ की चुनौती
2027 की जनगणना भारत की पहली ऐसी जनगणना होगी जिसमें तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाना है। भागलपुर में चार्ज ऑफिसर्स को दिया जा रहा यह प्रशिक्षण इस बात की बुनियाद है कि आने वाले समय में फील्ड वर्क कितना सुचारु होगा। अक्सर जनगणना में ‘मकान छूट जाने’ या ‘गलत सूचीकरण’ की शिकायतें आती हैं, ऐसे में यह 6 दिवसीय गहन मंथन प्रशासन के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।


